गाजियाबाद का डासना मंदिर: जानिए पाकिस्तान के हिंगलाज भवानी से अनोखा कनेक्शन
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Dasna Devi Mandir Ghaziabad: भारत की पावन धरा पर ऐसे कई रहस्यमयी और प्राचीन मंदिर हैं, जिनका इतिहास सदियों नहीं बल्कि युगों पुराना है. ऐसा ही एक त्रियुगीन आस्था का केंद्र है गाजियाबाद के डासना में स्थित ऐतिहासिक ‘मां शिव शक्ति धाम देवी मंदिर’. रामायण काल में ऋषि विश्रवा की तपोभूमि, महाभारत काल में पांडवों का आश्रय स्थल और भगवान परशुराम की तपस्थली रहा यह मंदिर जन-आस्था का एक अद्भुत स्तंभ है. आइए जानते हैं इस प्राचीन मंदिर का गौरवशाली इतिहास, मुगलकाल की वो गाथा और इस मंदिर का पाकिस्तान के हिंगलाज भवानी मंदिर से क्या अनोखा कनेक्शन है.
Dasna Devi Mandir Ghaziabad: भारत को आस्था और अध्यात्म की भूमि कहा जाता है. यहां हर शहर, हर कस्बे और हर गांव में ऐसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जिनका इतिहास सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों वर्षों पुराना माना जाता है. इन्हीं प्राचीन आस्था केंद्रों में से एक है गाजियाबाद के डासना स्थित ‘मां शिव शक्ति धाम देवी मंदिर’. यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, पौराणिक मान्यताओं और जन-आस्था का ऐसा अनूठा संगम है, जो सदियों से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है. मंदिर से जुड़ी कथाएं रामायण काल, महाभारत काल और मुगलकाल तक फैली हुई हैं, जबकि यहां मौजूद प्राचीन तालाब भी अपनी अलग पहचान और धार्मिक मान्यता रखता है. यही कारण है कि गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं.
परशुराम की तपस्थली और पांडवों का इतिहास
गाजियाबाद के डासना स्थित प्राचीन देवी मंदिर के महंत ने बताया कि यह मंदिर देश के अत्यंत प्राचीन तीर्थ स्थलों में गिना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने यहां घोर तपस्या की थी और स्वयं शिवलिंग की स्थापना की थी. महाभारत काल से जुड़ी मान्यता के अनुसार, लाक्षागृह से सुरक्षित निकलने के बाद पांडवों ने माता कुंती के साथ अपने अज्ञातवास का कुछ समय इसी पावन स्थान पर बिताया था. वहीं, यह भी कहा जाता है कि रावण के पिता ऋषि विश्रवा ने भी यहां भगवान शिव की कठोर आराधना की थी.
मुगलकाल का हमला और तालाब में छिपी मूर्ति का रहस्य
इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मुगलकाल के दौरान इस प्राचीन मंदिर को भारी क्षति पहुंचाई गई थी. उस कठिन समय में मंदिर के तत्कालीन महंत ने देवी की पवित्र मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उसे पास में ही स्थित एक तालाब में छिपा दिया था. कहा जाता है कि इस घटना के लगभग दो सौ वर्ष बाद, तत्कालीन महंत जगत गिरि महाराज को स्वप्न में माता ने दर्शन दिए और तालाब में अपनी प्रतिमा होने का संकेत दिया. इसके बाद जब उस तालाब में खुदाई कराई गई, तो वहां से माता की वही ऐतिहासिक प्रतिमा सकुशल प्राप्त हुई, जिसके बाद मंदिर की पुनः स्थापना की गई.
दुर्लभ कसौटी पत्थर की प्रतिमा, पाकिस्तान से अनोखा कनेक्शन
मंदिर में स्थापित मां काली की प्रतिमा अपनी कई अनूठी विशेषताओं के लिए जानी जाती है. यहां माता कमल के फूल पर खड़ी मुद्रा में विराजमान हैं और यह दिव्य प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ कसौटी पत्थर से निर्मित बताई जाती है. मान्यता है कि इस विशिष्ट प्रकार की प्रतिमाएं पूरी दुनिया में केवल चार स्थानों पर ही स्थापित हैं, जिनमें से तीन मूर्तियां भारत में और एक पाकिस्तान में स्थित है. इन स्थानों में कोलकाता (पश्चिम बंगाल), कामाख्या धाम (असम), डासना देवी मंदिर (उत्तर प्रदेश) और पाकिस्तान का प्रसिद्ध हिंगलाज देवी मंदिर शामिल हैं.
चर्म रोगों से मुक्ति दिलाता है यह प्राचीन तालाब
मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन तालाब भी श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र है. मान्यता है कि इसी पवित्र तालाब से माता की लुप्त प्रतिमा पुनः प्राप्त हुई थी. स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि इस तालाब में पूरी श्रद्धा से स्नान करने से सभी प्रकार के चर्म रोगों (त्वचा की बीमारियों) से राहत मिलती है. आज भी दूर-दूर से लोग यहां स्नान करने और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं. विशेषकर नवरात्रि के दौरान मंदिर में भव्य हवन, विशेष पूजा-अर्चना और माता का अलौकिक शृंगार किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं. आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का यह अद्भुत संगम डासना देवी मंदिर को गाजियाबाद की सबसे महत्वपूर्ण और गौरवशाली धार्मिक धरोहरों में शामिल करता है.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें