गाजियाबाद का यह अनोखा अस्पताल, जहां पक्षियों के लिए हैं प्राइवेट वार्ड से लेकर ICU तक की सुविधा
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Ghaziabad News: गाजियाबाद के कविनगर में स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पक्षी चिकित्सालय बेजुबान पक्षियों के लिए ‘संजीवनी’ साबित हो रहा है. यहां आधुनिक ICU और ओपीडी सुविधाओं के माध्यम से घायल पक्षियों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज किया जाता है. ‘जियो और जीने दो’ की भावना के साथ संचालित इस अस्पताल में वर्तमान में 600 से अधिक पक्षियों की देखभाल हो रही है. मानवता और जीव-दया की यह अनूठी मिसाल न केवल पक्षियों को नई उड़ान दे रही है, बल्कि समाज को करुणा का संदेश भी दे रही है.
Ghaziabad News: गाजियाबाद शहर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी के बीच कविनगर स्थित जैन मंदिर परिसर में एक ऐसी जगह है, जहाँ घायल और बीमार पक्षियों को नया जीवन मिलता है. श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पक्षी चिकित्सालय न सिर्फ इलाज का केंद्र है, बल्कि यह करुणा और जीवदया की एक जीवंत मिसाल भी पेश करता है. यहाँ हर पक्षी का इलाज पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है.
‘जियो और जीने दो’ का साक्षात स्वरूप
यह अनोखा अस्पताल जैन समाज की एक पवित्र पहल है. यहाँ रोज़ाना तोता, मैना, कबूतर, कौआ, बाज और चील जैसे सैकड़ों पक्षी उपचार के लिए लाए जाते हैं. स्थानीय निवासी अक्सर सड़क किनारे या छतों पर घायल पड़े पक्षियों को रेस्क्यू कर यहाँ पहुँचाते हैं. यह अस्पताल भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत को धरातल पर उतार रहा है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस: OPD से ICU तक
सुनने में शायद छोटा लगे, लेकिन इस अस्पताल की व्यवस्थाएं किसी बड़े अस्पताल से कम नहीं हैं. यहां तैनात डॉक्टर सोमप्रकाश और उनकी टीम समर्पण के साथ कार्य करती है. अस्पताल में छोटी ओपीडी से लेकर गंभीर पक्षियों के लिए आधुनिक आईसीयू (ICU) की सुविधा भी उपलब्ध है. वर्तमान में यहां 600 से अधिक पक्षी स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं.
धैर्य और ममता से होता है इलाज
डॉक्टरों का मानना है कि पक्षियों का उपचार बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि वे अपनी पीड़ा बोलकर नहीं बता सकते. यहाँ अनुभव और ममता ही सबसे बड़ी औषधि है. चाहे वह एक छोटा सा कबूतर हो या शिकारी बाज, यहाँ किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता. इलाज के बाद जब कोई पक्षी स्वस्थ होकर खुले आसमान में उड़ान भरता है, तो वह दृश्य सेवादारों की मेहनत को सफल बना देता है.
यह अस्पताल आने वाली पीढ़ियों को सिखाता है कि करुणा की उड़ान किसी धर्म या जाति की मोहताज नहीं होती. गाजियाबाद का यह केंद्र साबित करता है कि यदि सेवा का संकल्प हो, तो हम बेजुबान जीवों के जीवन में भी खुशहाली के रंग भर सकते हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें