गेहूं कटाई के बाद खाली खेतों में करें गोबर वाला उपाय, धान की पैदावार होगी बंपर

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गेहूं कटाई के बाद खाली खेतों में करें गोबर वाला उपाय, धान की पैदावार होगी बंपर


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गेहूं कटाई के बाद खाली खेतों में करें गोबर वाला उपाय, धान की पैदावार होगी बंपर

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Agriculture News: गेहूं की कटाई के बाद खेत कुछ समय के लिए खाली रहते हैं और यही समय मिट्टी की सेहत सुधारने का सबसे अच्छा मौका माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर इस दौरान किसान गोबर की सड़ी हुई खाद का सही तरीके से उपयोग करें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और धान की फसल बेहतर होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक खाद से न सिर्फ जमीन की गुणवत्ता सुधरती है बल्कि उत्पादन भी बढ़ता है.

गोरखपुर: गेहूं की कटाई के बाद ज्यादातर किसान धान की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन इस बीच खेत कुछ समय के लिए खाली रह जाते हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यही समय मिट्टी की सेहत सुधारने का सबसे सही मौका होता है. अगर किसान इस समय गोबर की सड़ी हुई खाद का सही तरीके से इस्तेमाल करें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और आने वाली धान की फसल भी बेहतर तैयार होती है.

गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कृषि विभाग के प्रोफेसर अनुपम दुबे के अनुसार गोबर प्राकृतिक खाद का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है. उन्होंने बताया कि इससे मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ते हैं और खेत की नमी लंबे समय तक बनी रहती है. यही कारण है कि धान जैसी फसल के लिए यह बहुत फायदेमंद साबित होता है.

खेत में गोबर डालने का सही तरीका
प्रोफेसर अनुपम दुबे ने बताया कि किसान गोबर को सीधे खेत में डालने के बजाय सड़ा हुआ खाद बनाकर इस्तेमाल करें. क्योंकि, ताजा गोबर कई बार खेत में गर्मी पैदा कर देता है, जिससे पौधों को नुकसान हो सकता है. इसलिए गोबर को 2 से 3 महीने तक गड्ढे में सड़ाकर जैविक खाद तैयार करनी चाहिए. गेहूं की कटाई के बाद जब खेत खाली हो जाए, तब जरूरत के अनुसार प्रति बीघा खाद खेत में फैला दें और हल्की जुताई करके उसे मिट्टी में मिला दें. इससे पोषक तत्व सीधे जमीन में पहुंच जाते हैं और मिट्टी उपजाऊ बनती है.
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हरी खाद से बढ़ेगा ज्यादा फायदा
एक्सपर्ट के अनुसार किसान गोबर की खाद के साथ ढैंचा या सन जैसी हरी खाद वाली फसल भी लगा सकते हैं. कुछ समय बाद इन फसलों को खेत में पलट देने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है और खेती की लागत भी घटती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है. ऐसे में गोबर की खाद मिट्टी को फिर से उपजाऊ करने का काम करती है. इससे खेत में केंचुए और सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है, जो फसल के लिए बहुत लाभकारी होते हैं. प्रोफेसर अनुपम दुबे के अनुसार अगर किसान धान रोपाई से पहले गोबर की खाद का सही उपयोग करें तो फसल मजबूत होती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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