गेहूं की पहली सिंचाई के बाद पत्तियां क्यों हो रहीं पीली? जानिए कारण और बचाव के उपाय

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गेहूं की पहली सिंचाई के बाद पत्तियां क्यों हो रहीं पीली? जानिए कारण और बचाव के उपाय


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Wheat Cultivation Tips : गेहूं की बुवाई को एक महीना बीतने के बाद पहली सिंचाई के दौरान कई किसानों के खेतों में पत्तियों का पीलापन दिखाई दे रहा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या पोषक तत्वों की कमी, खेत में जलभराव, मिट्टी की खराब सेहत, कीट प्रकोप या पीली रतुआ जैसी बीमारियों के कारण हो सकती है.

लखीमपुर : गेहूं की बुवाई को लगभग एक महीना बीत चुका है और इस समय फसल में विभिन्न रोगों का खतरा बढ़ जाता है. इस अवस्था में पीला रतुआ, पत्ती झुलसा, करपा और जड़ सड़न जैसी बीमारियां फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं. ठंड, अधिक नमी और कोहरे के कारण रोगजनक तेजी से सक्रिय हो जाते हैं. यदि समय पर निगरानी और उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इसलिए किसानों को खेत का नियमित निरीक्षण करना चाहिए, संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से रोगनाशी दवाओं का छिड़काव करें, ताकि फसल सुरक्षित रह सके और अच्छी पैदावार मिल सके.

जिन किसानों ने नवंबर माह में गेहूं की बुवाई की थी, उनकी फसल में इस समय पहली सिंचाई का दौर चल रहा है. इसी बीच कई खेतों में गेहूं की पत्तियां अचानक पीली पड़ने लगी हैं, जिससे किसान चिंतित हैं. समय रहते समस्या पर ध्यान न दिया गया तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में गिरावट आना तय है.

खाद की सही मात्रा जरूरी
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन बताते हैं कि गेहूं में पीलापन आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. आमतौर पर पहली सिंचाई 20 से 25 दिन के भीतर की जाती है और इसके बाद फसल को आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत होती है. कई बार किसान सिंचाई तो समय पर कर लेते हैं, लेकिन खाद और उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग नहीं कर पाते, जिससे पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता. इसके अलावा मिट्टी की खराब सेहत, कीटों का प्रकोप और पीली रतुआ जैसी बीमारियां भी पत्तियों के पीले पड़ने का कारण बन सकती हैं.

इन कारणों से भी हो सकती है गेहूं की पत्तियां पीली
डॉ. प्रदीप बिसेन ने बताया कि पहली सिंचाई के दौरान यदि खेत में पानी लंबे समय तक एक जगह जमा रहता है, तो भी गेहूं की फसल में पीलापन आ सकता है. जिंक, सल्फर, नाइट्रोजन और आयरन की कमी होने पर यह समस्या और बढ़ जाती है. ऐसे में प्रति एकड़ करीब 10 किलो जिंक का प्रयोग करना लाभकारी होता है. साथ ही खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करना बेहद जरूरी है. यदि किसान समय रहते इन बातों का ध्यान रखें और संतुलित खाद-उर्वरक का इस्तेमाल करें, तो गेहूं की फसल को पीलापन से बचाया जा सकता है और संभावित नुकसान से राहत मिल सकती है.

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mritunjay baghel

मीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ें

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