‘चोरी या फिर अनदेखी का दर्द…’, SIT की जांच में क्यों सहयोग कर रहे संतोष दुबे?
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अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित दान और भूमि मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सामने एक बड़ा मोड़ आ गया है. राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे प्रमुख कारसेवक और धर्म सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष दुबे ने एसआईटी को बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे हैं. इससे पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दर्ज कराने के बाद उन्होंने सीओ सदर कार्यालय पहुंचकर साक्ष्य जमा किए. इन दस्तावेजों में 5 प्रमुख मंदिरों की भूमि और चढ़ावे से जुड़े गंभीर दावे हैं, जिससे इस हाई-प्रोफाइल जांच में खलबली मच गई है.
कार सेवा से अनदेखी तक – राम मंदिर के लिए कार सेवा करने वाले संतोष दुबे की कहानी.
अयोध्या: राम मंदिर से जुड़े कथित दान और भूमि मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सामने मंगलवार को एक नया घटनाक्रम सामने आया. राम मंदिर कारसेवा से जुड़े रहे और धर्म सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष दुबे ने सीओ सदर कार्यालय पहुंचकर एसआईटी के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज और कथित साक्ष्य सौंपे. इससे एक दिन पहले उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसआईटी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था. बयान के दौरान जांच अधिकारियों ने उनसे उपलब्ध दस्तावेज और प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा था, जिसके बाद उन्होंने यह दस्तावेज जांच एजेंसी तक पहुंचाए.
संतोष दुबे ने बताया कि एसआईटी ने बयान दर्ज करने के बाद उनसे कहा था कि यदि उनके पास मामले से जुड़े कोई भी प्रमाण या दस्तावेज हैं तो उन्हें उपलब्ध कराया जाए.इसी निर्देश के तहत उन्होंने सीओ सिटी के माध्यम से संबंधित दस्तावेज एसआईटी तक भेजे हैं.उनका कहना है कि उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष विस्तार से रखा है और अब उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच होगी.
राम मंदिर के लिए गोली खाने वाले संतोष की कहानी
संतोष दुबे उन कारसेवकों में शामिल रहे हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी. उनका कहना है कि आंदोलन के दौरान उन्होंने गोलियां भी झेलीं और जेल भी गए, लेकिन मंदिर निर्माण के बाद अनेक पुराने कारसेवकों को उचित सम्मान और स्थान नहीं मिला.पिछले कुछ समय से वह राम मंदिर से जुड़े कथित दान चोरी और भूमि मामलों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं तथा मीडिया के सामने अपनी बात रखते रहे हैं.
जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज
उन्होंने दावा किया कि एसआईटी को सौंपे गए दस्तावेजों में राम जन्मभूमि से जुड़े पांच मंदिरों के कथित भूमि और चढ़ावे के मामलों का उल्लेख है. उनके अनुसार इन दस्तावेजों में कुछ ऐसे तथ्यों और रिकॉर्ड को शामिल किया गया है जिन्हें वह जांच के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह अभी और रिकॉर्ड एकत्र कर रहे हैं तथा 23-24 तारीख के बाद अतिरिक्त दस्तावेज भी जांच एजेंसी को सौंपेंगे.
संतोष दुबे ने कहा कि उन्होंने एसआईटी से अपील की है कि इस पूरे मामले को केवल कानूनी नहीं बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषय के रूप में भी देखा जाए. उनका कहना है कि उन्हें जांच एजेंसी पर फिलहाल भरोसा है और इसी कारण उन्होंने किसी बड़े आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाया. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका अंतिम विश्वास तभी बनेगा जब उनकी शिकायतों पर विधिक कार्रवाई होगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच के संकेत सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं, लेकिन निष्पक्षता का वास्तविक आकलन तभी होगा जब जांच पूरी होगी और संबंधित शिकायतों पर निर्णय लिया जाएगा. उनका कहना है कि यदि न्याय मिला और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो यह धार्मिक आस्था की जीत होगी, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह आगे भी लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र और राज्य सरकार से जांच संबंधी रिपोर्ट मांगे जाने के विषय पर संतोष दुबे ने कहा कि जांच प्रक्रिया में इस तरह की रिपोर्ट मांगी जाना सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने दोहराया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी अतिरिक्त दस्तावेज एवं साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे. हालांकि, संतोष दुबे द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण एसआईटी की जांच और उसके अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
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