जब नहीं होती थी बारिश, तब बच्चे खेलते थे काल कलौटी…जानिए क्या है यह परंपरा
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उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बारिश के लिए निभाई जाने वाली ‘काल कलौटी’ एक अनोखी परंपरा है. इस रस्म में बच्चे और युवा मिट्टी में लोटते हुए इंद्रदेव से वर्षा की प्रार्थना करते हैं. सदियों पुरानी यह मान्यता आज भी गांवों में लोगों की आस्था और संस्कृति का हिस्सा बनी हुई है.
सुल्तानपुर: भारत में कई ऐसी संस्कृतियों और मान्यताएं हैं जिन पर लोगों का विश्वास करना मुश्किल होता है, लेकिन कभी-कभी वही संस्कृतियां और मान्यताएं जब साबित होने लगती हैं, तो लोगों को उस पर विश्वास करना ही पड़ता है. ऐसी ही एक मान्यता है उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में, जहां काल कलौटी खेली जाती है. यह एक ऐसी मान्यता है जिसका संबंध बारिश और गर्मी से जुड़ा हुआ है. पहले के समय जब बारिश नहीं होती थी, तो गांव के बच्चे काल कलौटी खेलते थे. काल कलौटी के दौरान सभी बच्चे गांव में एक दूसरे के घर पर जाते और सिर पर पानी डालकर मिट्टी में लोटते थे. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से बारिश हो जाती थी, तो आईए जानते हैं क्या है काल कलौटी की मान्यता.
क्या होती है काल कलौटी
ग्रामीण योगेश कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि काल कलौटी उत्तर भारत की ग्रामीण संस्कृति का वह हिस्सा है जिसका इस्तेमाल गर्मी के मौसम में या फिर मानसून के दरमियान बारिश न होने की वजह से बारिश के लिए किया जाता था. यह एक खेल भी है और रस्म भी. जिसमें बच्चे युवा और अधिक उम्र के लोग भी शामिल होते हैं. इससे भगवान इंद्रदेव को प्रसन्न करने की कोशिश की जाती है.
करते हैं यह काम
काल कलौटी परंपरा को निभाने के लिए गांव के बच्चे और युवा इकट्ठा होते हैं और गांव के प्रत्येक घर में जाते हैं और घर के ठीक सामने द्वार पर अपने कपड़े उतार कर वे लोटते हैं. इस दरमियान पानी भी उनके शरीर पर डाला जाता है. जब मिट्टी के ऊपर पानी पड़ता है तो मिट्टी सन जाती है और उसकी चहटा बनता है. ऐसी मान्यता है कि सूखी धरती की प्यास बुझाने के लिए बच्चे अपने शरीर को पसीने और पानी से सींचते हैं और यह इंद्रदेव से मांग करते हैं कि बारिश करवाई जाए.
भगवान इंद्रदेव को लगाया जाता है भोग
यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक की गांव के प्रत्येक घर काल कलौटी से पूरा ना हो जाए. जब बच्चे और युवा काल कलौटी खेल लेते हैं तब उसके बाद सभी घरों से अनाज मांगा जाता है और एक जगह पर एकत्रित होकर उस अनाज से भोजन बनाया जाता है. भोजन जब बन जाता है, तो सबसे पहले भगवान इंद्रदेव को भोग लगाया जाता है और प्रार्थना की जाती है कि अब बारिश हो जाए. कई बार इस तरह की परंपराओं की सफलता ने इस पर लोगों को विश्वास करने को मजबूर भी कर दिया है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें