जहां कभी खेती बन गई थी एक सपना, अब वहीं लहलहा रही हैं फसलें, जानें कैसे…
Last Updated:
Kaushambi News in Hindi: कौशांबी जिले के अलवारा झील के पास बाढ़ से खेती बर्बाद होती थी. किसानों की पहल पर प्रशासन ने नाले का जीर्णोद्धार किया, जिससे 1480 किसानों को फायदा हुआ और 92.391 हेक्टेयर जमीन पर खेती फिर…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- जिलाधिकारी की पहल से 92.391 हेक्टेयर भूमि पर खेती शुरू हुई.
- मनरेगा और जनसहभागिता से नाले का जीर्णोद्धार हुआ.
- 1480 किसानों को जलनिकासी से खेती में लाभ मिला.
किसानों की पहल पर प्रशासन ने लिया संज्ञान
जलभराव की समस्या को लेकर किसानों ने आपस में मिलकर चर्चा की और फिर जिला प्रशासन से संपर्क किया. किसानों ने जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी से मिलकर बताया कि पहले यहां एक पुराना नाला हुआ करता था, जिससे बाढ़ का पानी निकलकर यमुना नदी तक पहुंच जाता था. लेकिन अब वह नाला पूरी तरह से बंद हो गया है. किसानों ने कहा कि अगर उस नाले का फिर से निर्माण हो जाए, तो उनकी खेती दोबारा शुरू हो सकती है.
जनसहयोग से बना नया रास्ता
रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी ने निर्णय लिया कि नाले का जीर्णोद्धार मनरेगा और जनसहभागिता के जरिए किया जाएगा. खास बात ये रही कि इसके लिए सरकार से कोई अतिरिक्त बजट नहीं लिया गया. काम की शुरुआत होते ही खुद किसान आगे आए और श्रमदान शुरू किया. जब बाकी गांवों के लोग भी जुड़ते गए, तो काम तेजी से आगे बढ़ा.
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने इस परियोजना को एक मिसाल बताया. उन्होंने कहा कि जलमग्न 92.391 हेक्टेयर जमीन से अब जलनिकासी संभव हो पाई है. इससे खेती दोबारा शुरू हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है.
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के प्रयास केवल खेती नहीं बहाल करते, बल्कि गांवों में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का रास्ता भी खोलते हैं. लंबे समय से जो जमीन बेकार पड़ी थी, वहां अब हरियाली लौट आई है और किसान एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं.