‘जेब, मोजा पैंट…’ राम मंद‍िर का पैसा कैसे-कैसे चुराया, ट्रस्‍ट ने क्‍या बताया, यहां जानें

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‘जेब, मोजा पैंट…’ राम मंद‍िर का पैसा कैसे-कैसे चुराया, ट्रस्‍ट ने क्‍या बताया, यहां जानें


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Ram Mandir All Update: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में 6 जुलाई 2026 का दिन बेहद ऐतिहासिक और निर्णायक साबित हुआ. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आपात बैठक में भारी विवाद के बीच महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. वहीं, कृष्ण मोहन को नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है. दूसरी ओर, देर रात आई एसआईटी (SIT) की पहली रिपोर्ट में 70 बार चोरी की पुष्टि की गई.

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राम मंदिर दान चोरी को लेकर दिनभर का अपडेट

Ram Mandir Update: राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर आज यानी 6 जुलाई का दिन काफी अहम रहा. आज श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की एक अहम बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा की इस्तीफा मंजूर की गई. अगले महासचिव चुने जाने तक कृष्ण मोहन को चुना गया. साथ ही एक कमेटी का गठन हुआ है, जो राम मंदिर ट्रस्ट के लिए सीईओ का चयन करेगी, इस कमेटी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज शामिल हैं. साथ ही राम मंदिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में दान की वस्तुओं की सार्वजनिक की, जिसकी चोरी का अफवाह उड़ाया गया था.

राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर आज यानी 6 जुलाई का दिन काफी अहम रहा. आज यानी 6 जुलाई सोमवार को श्रीराम जन्भूमि ट्र्स्ट की बैठक आयोजित की गई. इसमें दान चोरी और कोरड़ों देश-विदेश के श्रद्धालुओं के आस्था पर ठेस पहुंचाने वालों पर कई अहम फैसले लिए गए. इस बैठक में साफ किया गया कि आगे कभी इस प्रकार की घटना न हो. साथ ही बैठक में इस बात पर फैसला लिया गया कि एसआईटी की जिम्मेदारी सिर्फ जांच करना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी चोरी न हो इसे लेकर सलाह देना भी होगा.

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर: राम मंदिर में दान चोरी के बाद मचे देशव्यापी बवाल के बीच ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपना त्यागपत्र दे दिया था. सोमवार को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में निष्पक्ष जांच को सुनिश्चित करने के लिए इन दोनों शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे पर विचार किया गया. ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे को सर्वसम्मति से आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है.

कृष्ण मोहन बने ट्रस्ट के नए अंतरिम महामंत्री: चंपत राय के इस्तीफे के बाद खाली हुए सबसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए ट्रस्ट ने तत्काल नई व्यवस्था की है. ट्रस्ट के न्यासी श्री कृष्ण मोहन जी को नए अंतरिम महामंत्री (Interim General Secretary) चुना गया. वे अब आगे के सांगठनिक और प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करेंगे.

नए सीईओ (CEO) का चयन: राम मंदिर के रोजमर्रा के कार्य और संचालन को पूरी तरह पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए एक योग्य मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तलाश शुरू कर दी गई है. इसके लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े जैसे दिग्गज शामिल हैं.

उपहारों की चोरी की अफवाहों का खंडन: सोशल मीडिया और कुछ प्रसार माध्यमों में यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि दानपात्रों के अलावा रामलला को चढ़ाई गई कीमती वस्तुएं भी गायब हो गई हैं. इस पर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुल 2,926 बेशकीमती भेंटों का पूरा रजिस्टर सार्वजनिक किया. उन्होंने दिखाया कि सिंधी समाज द्वारा दी गई 200 किलो चांदी और अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं ट्रस्ट की देखरेख में पूरी तरह सुरक्षित हैं.

पहली बार जारी हुआ दान और खर्च का ब्यौरा: राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार निधि समर्पण अभियान, कॉर्पस फंड और दानपात्रों में आए चढ़ावे का पूरा ब्यौरा आधिकारिक रूप से देश के सामने रखा गया. जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ट्रस्ट को निधि समर्पण और कॉर्पस दान के माध्यम से कुल 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिसमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत व्यय में इस्तेमाल किए जा चुके हैं.

582 करोड़ का चढ़ावा और चांदी खुलासा: ट्रस्ट की रिपोर्ट में बताया गया कि मंदिर की शुरुआत से लेकर 31 मार्च 2026 तक रामलला के दरबार में कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है, जिसमें से 391 करोड़ रुपये संचालन व्यय में खर्च हुए. इसके अलावा, दान में मिली चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल (Mint) में गलाकर उनकी छड़ें बना दी गई हैं, जिनके प्रमाण-पत्र और शुद्धता का विवरण वजन सहित उपलब्ध है.

40 दिनों में 70 बार हुई चोरी: देर रात कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय एसआईटी की प्रारंभिक गोपनीय रिपोर्ट सामने आई, जिसने सबको चौंका दिया. रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच महज 40 दिनों के भीतर काउंटिंग रूम से 70 बार चोरी की गई. सीसीटीवी फुटेज में गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते साफ पकड़े गए.

6 मुख्य आरोपियों सहित 8 लोगों पर एफआईआर और गिरफ्तारियों की पुष्टि: एसआईटी की जांच के आधार पर सीधे तौर पर गबन में शामिल पाए गए 6 मुख्य संविदा कर्मियों – अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामाशंकर मिश्रा के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है. इसके अलावा, घोर लापरवाही बरतने वाले प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव और अवैध रूप से चाबियां रखने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल 8 लोगों पर सख्त कार्रवाई शुरू हो चुकी है.

सीसीटीवी बैकअप में लापरवाही: एसआईटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि यह घोटाला सुरक्षा नियमों के घोर उल्लंघन के कारण हुआ. काउंटर पर कर्मचारियों की कोई सघन तलाशी नहीं होती थी. वे मोबाइल लेकर अंदर जाते थे. सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि ऑडिट रिपोर्ट की 180 दिनों के सीसीटीवी बैकअप की सिफारिश को दरकिनार कर केवल 45 दिनों का बैकअप रखा गया था, जिससे पुरानी चोरियों का सटीक आकलन नहीं हो सका.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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