तो मैं रिजाइन आपको देना चाहता हूं.. आंकड़े दबाए, छिपाए और मिटाए क्यों गए? अखिलेश यादव महाकुंभ हादसे पर जमकर बोले
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Akhilesh Yadav News : अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि पुण्य कमाने आए लोग वहां से अपनों के शव लेकर गए थे. चमत्कारी करिश्मा तो ये हुआ कि श्रद्धालुओं के शव मिल गए थे, लेकिन सरकार उनके मरने की बात स्वीकार नहीं कर…और पढ़ें
अखिलेश यादव ने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भाषण दिया.
लखनऊ : संसद भवन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के कन्नौज सांसद अखिलेश यादव जमकर बोले. उन्होंने महाकुंभ में हुए भगदड़ हादसे को लेकर संसद में सवाल उठाए और महाकुंभ के आपदा प्रबंधन और खोया पाया केंद्र की जिम्मेदारी भारतीय सेना के हवाले कर दिए जाने की मांग कर डाली. साथ ही कहा कि आंकड़े दबाए, छिपाए और मिटाए क्यों गए? सरकार इस हादसे के आंकड़ें क्यों जारी नहीं कर रही.. यही नहीं, सांसद की तरफ से बीच में टोकने वाले सांसदों पर भी कटाक्ष किया गया. इस पर खूब हंसी-ठिठोली सदन में हुई. आइये जानते हैं अखिलेश की संसद में कही गई हर बात…
पहले तो अखिलेश यादव ने अपने भाषण की शुरुआत में स्पीकर ओम बिड़ला से आग्रह किया कि जब चर्चा खत्म हो रही होगी तब महाकुंभ हादसे के पीड़ितों के प्रति 2 मिनट मौन रखने की इजाजत दी जाए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को तकलीक है और दुख होना चाहिए, हमारा अनुरोध है जहां सरकार बजट के आंकड़े दे रही है, उससे पहले महाकुंभ में मरने वालों के आंकड़े भी दिए जाएं. इस बारे में सर्वदलीय बैठक बुलाया जाए. उन्होंने मांग की कि महाकुंभ आपदा प्रबंधन व खोया पाया केंद्र की जिम्मेदारी सेना को दी जाए. घायलों का इलाज, दवाइयां, डॉक्टर, भोजन-पानी का आंकड़ा सदन में रखा जाए. इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर घोर दंडात्मक एक्शन लिया जाए.
उन्होंने कहा कि हम डबल इंजन सरकार से पूछते हैं कि अगर अपराध बोध नहीं था तो आंकड़े दबाए, छिपाए और मिटाए क्यों गए? सच छिपाना, मिटाना भी तो अपराध है? जहां इंतजाम होना चाहिए था, वहां प्रचार हो रहा था. यह निंदनीय है. डबल इंजन सरकार का प्रचार करते अब तो वो होर्डिंग हटा देने चाहिए. महाकुंभ के डिजिटल होने का दावा किया गया, वो लोग अब मृतकों की डिजिट तक नहीं दे पा रहे हैं. हमारे अपने लोग मारे गए हैं. किसी मां, किसी के पिता, बहू, बेटी, भाई, चाचा, चाची मारी गईं. बच्चों के आंकड़ें तो ये दे नहीं पा रहे. खोया पाया केंद्र को भी लोग नहीं ढूंढ पा रहे.
सपा सांसद ने कहा कि कुंभ का आयोजन सदियों से होता आया है. 144 साल बाद महाकुंभ होने जा रहा है, उसका इतना प्रचार किया गया कि सरकार ने 100 करोड़ लोगों के आने का इंतजाम किया गया है. अगर ये बात गलत है तो मैं रिजाइन आपको देना चाहता हूं. जहां तक मेरी समझ और जानकारी कहती है कि जो ज्योतिष संबंधी चीजों को की समझते होंगे कि वो ये स्वीकार करते होंगे कि जो भी कुंभ होता होगा 144 साल बाद ही होता होगा. लेकिन ये कहा गया कि नक्षत्र ऐसे हैं.. मैं सरकार से ये कहना चाहता हूं कि सतयुग से कलियुग तक ये सनातन परंपरा रही है कि संत, महात्मा मुहूर्त के हिसाब से शाही स्नान करते हैं. लेकिन भाजपा के राज में ये परंपरा टूट गई और हादसे को छिपाकर ये आदेश दिया गया कि अखाड़े शाही स्नान करने जाएं. ये सनातन परंपरा तोड़कर अच्छा नहीं किया गया.
अखिलेश ने सदन में कहा कि पुण्य कमाने आए लोग वहां से अपनों के शव लेकर गए थे. चमत्कारी करिश्मा तो ये हुआ कि श्रद्धालुओं के शव मिल गए थे, लेकिन सरकार उनके मरने की बात स्वीकार नहीं कर रही थी. जब ये बात पता चल गई गई कि लाशें मोर्चरी में पड़ी है. उसके बाद सरकार अपने हेलिकॉप्टर फूल बरसा रही थी. ये कहां की परंपरा है. जहां लाशें पड़ी थीं, चप्पलें, कपड़े पड़े थे… उन सबको जेसीबी मशीन से उठाकर फेंक दिया गया. कोई कद्र नहीं की गई. उन्होंने कहा कि नेता सदन को अभी भाषण देना है. हमारे यूपी के सीएम ने शोक नहीं प्रकट किया था. जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने शोक व्यकत किया, उसके 17 घंटे बाद सरकार ने सच को स्वीकार किया.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि दस साल में एक भी राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल नहीं खोला गया है. इज ऑफ डूइंग में देश के सभी मंत्री पहुंच जाते हैं. यूपी में सबसे बड़ी इनवेस्टर्स मीट का आयोजन हुआ था, डिफेंस भी प्रोग्राम हुए थे. 40 लाख करोड़ के एमओयू को जमनी पर उतारने की बात की गई थी, उसमें कितने जमीन पर उतारे गए? कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार के डबल इंजन आपस में टकरा रहे हैं, बल्कि अब तो डिब्बे भी टकरा रहे हैं.
इतने में एक सांसद ने टोका तो अखिलेश ने मजाक करते टोकते हुए पूछा कि आप इंजन है या डिब्बे हैं? इस पर सदन में खूब ठहाके लगे. हालांकि अखिलेश ने कहा कि आप भी हमारे पुराने साथी हैं, बस जगह बदल गई है.
उन्होंने कहा कि आपने क्योटो, वेनिस का नाम सुना है? इसका सपना देखा गया था. 10 साल पूरे हो गए हैं और अभी तक वहां के वादे पूरे नहीं कर पाए हैं. जितनी भी मेट्रो आज यूपी में चल रही हैं सब सपा सरकार की देन हैं, कोई भी आपके टाइम नहीं चलीं. जो दिल्ली में मेट्रो बना रहे हैं वो बनारस में मेट्रो क्यों नहीं बना पा रहे? दिल्ली का विकास अपने आप हो जाएगा, बस भाजपा की दिल्ली वाली सरकार हस्तक्षेप करना बंद कर दे. 21 महीने में देश का सबसे बेहतरीन एक्सप्रेस वे हमने जमीन का अधिग्रहण करके दिखा दिया था. वायुसेना के सुखोई और मिराज को उतारकर हमने उसका उद्धाटन किया था.
Lucknow,Lucknow,Uttar Pradesh
February 04, 2025, 13:08 IST