दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष को प्रेमानंद महाराज ने क्या दी सलाह? आप भी कर लें नोट, बदल जाएगी जिंदगी
नई दिल्ली (DUSU President Meets Premanand Maharaj). दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान हाल ही में वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने विख्यात संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन किए. राजनीति की गहमागहमी और छात्र हितों के संघर्षों के बीच आर्यन मान का आध्यात्मिक झुकाव चर्चा का विषय बना हुआ है. वृंदावन के भक्तिमय माहौल में आर्यन मान ने न केवल प्रेमानंद महाराज का आशीर्वाद लिया, बल्कि छात्र नेतृत्व और व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी हासिल किया.
चरित्र की मजबूती ही असली जीत: महाराज जी
प्रेमानंद महाराज ने डूसू अध्यक्ष आर्यन मान से बातचीत के दौरान सबसे अधिक जोर ‘चरित्र’ पर दिया. उन्होंने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने वाले युवाओं के लिए बेदाग चरित्र ही उनकी सबसे बड़ी ताकत होती है. महाराज जी ने सलाह दी कि पद की गरिमा तभी बनी रहती है जब व्यक्ति निजी जीवन में व्यसनों (नशे) और अनैतिकता से दूर रहे. उन्होंने आर्यन को ऐसा व्यक्तित्व बनाने के लिए प्रेरित किया जिसे देखकर अन्य छात्र भी सही राह पर चलें.
राजनीति से ऊपर रखें सेवा भाव
प्रेमानंद महाराज जी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष आर्यन मान को समझाते हुए कहा कि डूसू का अध्यक्ष होना गौरव की बात है, लेकिन यह पद सेवा के लिए है, शासन के लिए नहीं. उन्होंने आर्यन मान को सलाह दी कि वे कैंपस में हर उस छात्र की आवाज बनें जो कमजोर है या जिसे मदद की जरूरत है. महाराज जी के अनुसार- यदि आपके पास शक्ति है तो उसका उपयोग किसी को झुकाने के लिए नहीं, बल्कि किसी गिरे हुए को उठाने के लिए करें.
क्रोध पर नियंत्रण और विनम्रता का पाठ
डूसू अध्यक्ष आर्यन मान ने प्रेमानंद महाराज जी से कहा कि छात्र नेता के जीवन में अक्सर टकराव की स्थितियां आती हैं. इस पर महाराज जी ने आर्यन को ‘धैर्य’ का मंत्र दिया. उन्होंने कहा कि क्रोध मनुष्य की बुद्धि खा जाता है. एक सफल नेता वही है जो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपनी वाणी पर संयम रखे और विनम्र बना रहे. उन्होंने समझाया कि विनम्रता ही वह गुण है जो विरोधी को भी मित्र बना सकता है. प्रेमानंद महाराज ने उन्हें अच्छा दोस्त बनने और सही लोगों से दोस्ती करने का पाठ भी पढ़ाया.
आध्यात्मिक अनुशासन और नाम-जप
आर्यन मान को आध्यात्मिक सलाह देते हुए महाराज जी ने कहा कि चाहे आप कितने भी व्यस्त क्यों न हों, ईश्वर के लिए समय जरूर निकालें। उन्होंने प्रतिदिन नाम-जप (राधा-नाम) करने की सलाह दी. इससे उनका मन शांत रहेगा और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी. उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक अनुशासन व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है, जिससे वह राजनीति का तनाव आसानी से झेल सकता है. आर्यन मान इस दौरान पूरे भक्ति भाव में नजर आए.
प्रेमानंद महाराज जी ने आर्यन से कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों की निगाहें उन पर हैं. इसलिए उन्हें अपनी जीवनशैली ऐसी रखनी चाहिए कि वे केवल नेता नहीं, बल्कि रोल मॉडल के रूप में पहचाने जाएं.