दुधारू पशुओं को छू भी नहीं पाएगी ठंड, जानें सबसे धांसू जुगाड़, रूम हीटर भी नहीं बचा पाएगा इतना
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Animal care in cold weather : पशुपालकों के लिए सर्दियों में चुनौतियां बढ़ जाती हैं. लोकल 18 से बात करते हुए गोंडा के चिकित्सक डॉ. राकेश तिवारी बताते हैं कि ठंड का मौसम पशुओं के लिए थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन सही देखभाल, अच्छा आहार, स्वच्छता और गर्म वातावरण देकर पशु न केवल सुरक्षित रहते हैं बल्कि अधिक दूध भी देते हैं.
ठंड का मौसम पशुओं के लिए चुनौती भरा होता है, लेकिन थोड़ी सी देखभाल और सही खान-पान से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध भी अच्छा मिलता है. एक्सपर्ट मानते हैं कि सर्दी की शुरुआत होते ही तैयारी कर लेने से बीमारियों का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है.

लोकल 18 से बातचीत में पशु चिकित्सा डॉ. राकेश तिवारी बताते हैं कि जैसे इंसानों को ठंड लगती है, वैसे ही पशुओं को भी ठंड तेजी से चुभती है. इसलिए बाड़े को गर्म रखने का विशेष ध्यान देना चाहिए. कोशिश करें कि पशुशाला के दरवाजे और खिड़कियां सर्द हवा के बीच बंद रखें. संभव हो तो फूस, टाट, प्लास्टिक शीट अथवा बोरे से चारों तरफ ढंक दें. पशुओं के सोने की जगह पर सूखा भूसा ये धान की पराली/पुआल बिछाएं, जिससे उनके शरीर को गर्माहट मिले. जमीन गीली हो तो तुरंत सुखाएं और नमी न रहने दें, वरना जोड़ में दर्द और बुखार की समस्या हो सकती है.

सर्दी में पशुओं को सामान्य से अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है, क्योंकि ठंड में शरीर का तापमान बनाए रखने में ऊर्जा ज्यादा लगती है. इसलिए सर्द मौसम में हरे चारे, दाना और खली की मात्रा थोड़ा बढ़ानी चाहिए. डॉ. राकेश तिवारी बताते हैं कि खली और दाना देने से शरीर में गर्मी पैदा होती है. गुड़, चोकर और सरसों की खली इस मौसम में विशेष लाभकारी है. हरा चारा जरूर दें ताकि पाचन सही बना रहे.
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ठंड में गर्म पानी पिलाना बेहद जरूरी है. अधिकतर पशुपालक सर्दियों में ठंडा पानी ही पिलाते हैं, जिससे निमोनिया, खांसी और बुखार होने का खतरा बढ़ जाता है. कोशिश करें कि दिन में कम से कम दो बार हल्का गुनगुना पानी पिलाएं. इससे न केवल पशु स्वस्थ रहेगा, बल्कि दूध की मात्रा भी बेहतर मिलेगी.

धूप पशुओं के लिए दवा का काम करती है. दिन में थोड़ा समय उन्हें खुले में बांधे, ताकि धूप शरीर तक पहुंचे और विटामिन-डी भी मिल सके.

सर्दी आने से पहले टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं का पूरा कोर्स करवा लेना चाहिए. इससे कई मौसमी बीमारियों से बचाव हो जाता है. अगर पशु खाना कम खा रहा हो, दूध अचानक कम हो जाए, सांस फूलने लगे या बुखार दिखे तो तुरंत उपचार करवाएं.