धान की खेती में गेमचेंजर है ₹10 वाला ये टेस्ट, बुवाई से पहले ही बता देगा पैदावार का हाल

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धान की खेती में गेमचेंजर है ₹10 वाला ये टेस्ट, बुवाई से पहले ही बता देगा पैदावार का हाल


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धान की खेती में गेमचेंजर है मात्र ₹10 वाला ये टेस्ट, जानें खासियत

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How to Select Healthy Paddy Seeds: धान की खेती से बंपर पैदावार लेने के लिए नर्सरी तैयार करने से पहले स्वस्थ और दमदार बीजों का चुनाव सबसे जरूरी कदम माना जाता है. कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनपी गुप्ता के अनुसार, किसान भाई मात्र 1 किलोग्राम साधारण खाने वाले नमक की मदद से घर बैठे ही खराब, थोथे और रोगग्रस्त बीजों को बिल्कुल अलग कर सकते हैं. इस बेहद सस्ती और आसान विधि को अपनाकर आप अपनी नर्सरी को सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे बाद में कीटनाशकों का खर्च बचता है. यह तरीका न सिर्फ पौधों को बीमारियों से बचाता है बल्कि आगे चल कर खेत में धान की अच्छी पैदावार भी देता है.

धान की खेती में अच्छी पैदावार की शुरुआत हमेशा मजबूत और स्वस्थ बीजों से होती है. अगर बीज सही चुने जाएं तो नर्सरी से लेकर खेत तक पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और फसल में बीमारी का खतरा भी काफी कम हो जाता है. इसी वजह से कृषि विशेषज्ञ बीज बोने से पहले उसकी सही जांच करने की सलाह देते हैं.

कृषि एक्सपर्ट डॉ एनपी गुप्ता ने बताया कि धान की खेती में नर्सरी प्रबंधन पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है. अगर शुरुआत में ही स्वस्थ और रोगमुक्त बीजों का चुनाव नहीं किया गया, तो आगे चलकर पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. कमजोर बीज न सिर्फ जमाव में समस्या पैदा करते हैं, बल्कि पौधों को बीमारियों के प्रति भी संवेदनशील बना देते हैं. इसलिए, बुवाई से पहले बीजों की गुणवत्ता परखना हर किसान के लिए जरूरी हो जाता है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ एनपी गुप्ता ने बताया कि धान की खेती में नर्सरी प्रबंधन पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है. अगर शुरुआत में ही स्वस्थ और रोगमुक्त बीजों का चुनाव नहीं किया गया, तो आगे चलकर पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. कमजोर बीज न सिर्फ जमाव में समस्या पैदा करते हैं, बल्कि पौधों को बीमारियों के प्रति भी संवेदनशील बना देते हैं. इसलिए, बुवाई से पहले बीजों की गुणवत्ता परखना हर किसान के लिए जरूरी हो जाता है.

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बीज चयन की यह नमक वाली विधि जितनी पुरानी है, उतनी ही वैज्ञानिक रूप से सटीक भी है. नमक मिलाने से पानी का घनत्व बढ़ जाता है, जिससे केवल वही बीज नीचे बैठ पाते हैं जो पूरी तरह पके और भारी होते हैं. इसके विपरीत, थोथे, खोखले और फंगस से प्रभावित बीज हल्के होने के कारण पानी की सतह पर तैरने लगते हैं. यह प्रक्रिया बेहद सस्ती और असरदार मानी जाती है. ये प्रक्रिया पहले ही तस्वीर साफ़ कर देती है की पैदावार कैसी होगी.

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इस तकनीक को आजमाने के लिए सबसे पहले एक बड़ा टब या बाल्टी लें. उसमें लगभग 10 लीटर साफ पानी भरें और फिर 1 किलोग्राम साधारण नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. जब नमक पूरी तरह पानी में घुल जाए, तब इसमें वह धान का बीज डालें जिसकी आपको नर्सरी तैयार करनी है. घोल की सही सांद्रता ही सटीक परिणाम देने में मदद करती है.

इस तकनीक को आजमाने के लिए सबसे पहले एक बड़ा टब या बाल्टी लें. उसमें लगभग 10 लीटर साफ पानी भरें और फिर 1 किलोग्राम साधारण नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. नमक आसानी से बाजार से मिल जाएगा जिसकी क़ीमत भी 10 से 20 रुपये तक होती है. जब नमक पूरी तरह पानी में घुल जाए, तब इसमें वह धान का बीज डालें जिसकी आपको नर्सरी तैयार करनी है. घोल की सही सांद्रता ही सटीक परिणाम देने में मदद करती है.

जैसे ही आप नमक के घोल में धान डालेंगे, आपको एक चमत्कारिक बदलाव दिखेगा. कुछ ही मिनटों में हल्के, खोखले, कीड़ों द्वारा खाए गए और रोगग्रस्त बीज पानी के ऊपर तैरने लगेंगे. किसानों को चाहिए कि वो किसी छन्नी या हाथ की मदद से इन तैरने वाले बीजों को निकालकर तुरंत अलग फेंक दें, क्योंकि ये बीज कभी भी स्वस्थ पौधा नहीं बन सकते.

जैसे ही आप नमक के घोल में धान डालेंगे, आपको एक चमत्कारिक बदलाव दिखेगा. कुछ ही मिनटों में हल्के, खोखले, कीड़ों द्वारा खाए गए और रोगग्रस्त बीज पानी के ऊपर तैरने लगेंगे. किसानों को चाहिए कि वो किसी छन्नी या हाथ की मदद से इन तैरने वाले बीजों को निकालकर तुरंत अलग फेंक दें, क्योंकि ये बीज कभी भी स्वस्थ पौधा नहीं बन सकते.

जैसे ही आप नमक के घोल में धान डालेंगे, आपको एक चमत्कारिक बदलाव दिखेगा. कुछ ही मिनटों में हल्के, खोखले, कीड़ों द्वारा खाए गए और रोगग्रस्त बीज पानी के ऊपर तैरने लगेंगे. किसानों को चाहिए कि वो किसी छन्नी या हाथ की मदद से इन तैरने वाले बीजों को निकालकर तुरंत अलग फेंक दें, क्योंकि ये बीज कभी भी स्वस्थ पौधा नहीं बन सकते.

खराब बीजों को हटाने के बाद, टब के निचले हिस्से में केवल वही बीज बचेंगे जो वजन में भारी, ठोस और पूरी तरह से स्वस्थ हैं. ये बीज उच्च अंकुरण क्षमता वाले होते हैं और इनसे निकलने वाले पौधे मजबूत बनते हैं. नीचे बैठे इन बीजों को सावधानीपूर्वक पानी से छानकर बाहर निकाल लें. यही आपके असली और उन्नत बीज हैं जो बेहतर पैदावार की गारंटी देते हैं.

नमक के घोल से निकाले गए स्वस्थ बीजों को सीधे नर्सरी में नहीं डालना चाहिए. नमक की परत बीजों के अंकुरण को रोक सकती है या उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए, इन भारी बीजों को तुरंत साफ और ताजे पानी से कम से कम 2 से 3 बार अच्छी तरह धोना चाहिए. अच्छी तरह धुलाई करने से बीजों के ऊपर जमा सारा नमक पूरी तरह साफ हो जाता है.

नमक के घोल से निकाले गए स्वस्थ बीजों को सीधे नर्सरी में नहीं डालना चाहिए. नमक की परत बीजों के अंकुरण को रोक सकती है या उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए, इन भारी बीजों को तुरंत साफ और ताजे पानी से कम से कम 2 से 3 बार अच्छी तरह धोना चाहिए. अच्छी तरह धुलाई करने से बीजों के ऊपर जमा सारा नमक पूरी तरह साफ हो जाता है.

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धोने के बाद, इन स्वस्थ बीजों को कुछ समय के लिए किसी छायादार स्थान पर सूती कपड़े पर फैलाकर सुखा लें, ताकि अतिरिक्त नमी निकल जाए. इसके बाद बीज को किसी फंगीसाइड से उपचारित करें. इस पूरी प्रक्रिया से तैयार किए गए बीज जब नर्सरी में बोए जाते हैं, तो उनका जमाव शत-प्रतिशत होता है और पौधे स्वस्थ रहते हैं.

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इस आसान विधि को अपनाने से किसानों का लागत खर्च न के बराबर आता है, लेकिन इसके लाभ दूरगामी होते हैं. स्वस्थ बीजों से तैयार नर्सरी में बीमारियां लगने का खतरा बहुत कम होता है, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च बच जाता है. मजबूत पौधे खेत में जाकर तेजी से विकास करते हैं, जिससे अंततः धान की बम्पर पैदावार होती है और किसानों की आमदनी में इजाफा होता है.



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