धार्मिक आस्था का केंद्र बना छोटी काशी कॉरिडोर, दीवारों पर उकेरी गईं कथाएं
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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित गोला गोकर्णनाथ शिव मंदिर, जिसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है, आस्था और पौराणिक कथाओं का एक प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां रावण द्वारा स्थापित शिवलिंग से जुड़ी अद्भुत कथा प्रचलित है, जो इस स्थल को और भी विशेष बनाती है. भव्य शिव कॉरिडोर, दीवारों पर उकेरी गई शिव कथाएं और श्रावण मास में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस स्थान को एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर बनाती है.
छोटी काशी कॉरिडोर को लंबे समय से धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. अब मंदिर परिसर की दीवारों पर बनाई गई चित्रकारी और शिव महिमा के दृश्य लोगों के आकर्षण का नया केंद्र बन गए हैं. इन भव्य चित्रों में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों को अत्यंत सुंदरता से दर्शाया गया है. इनमें शिव तांडव, कैलाश पर्वत, गंगा अवतरण, समुद्र मंथन, नंदी और माता पार्वती के साथ भगवान शिव के दिव्य स्वरूप को बेहद आकर्षक तरीके से उकेरा गया है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का गोला क्षेत्र, जिसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रमुख शिव नगरी और आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है. Gola Gokaran Nath में स्थित यह पवित्र स्थल भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता के अनुसार त्रेता युग में रावण भगवान शिवलिंग को लंका ले जा रहा था, तभी मार्ग में उसने लघुशंका के लिए शिवलिंग एक चरवाहे को सौंप दिया. कहा जाता है कि वह चरवाहा भगवान विष्णु की माया था. शिवलिंग का भार अत्यधिक होने के कारण चरवाहे ने उसे भूमि पर रख दिया, और उसी स्थान पर वह शिवलिंग स्थापित हो गई, जिसे आज इस पवित्र शिवधाम के रूप में पूजा जाता है.

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि जैसे-जैसे वे इन चित्रों को देखते हैं, उनके भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होने लगता है. ये चित्र केवल कलाकृति नहीं हैं, बल्कि धार्मिक संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत करते हैं. कई लोग यहां आकर तस्वीरें भी लेते हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जिससे इस धार्मिक स्थल की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है.
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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित छोटी काशी के नाम से प्रख्यात Gola Gokaran Nath का शिव मंदिर कॉरिडोर इन दिनों श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां का धार्मिक वातावरण और मंदिर परिसर की दीवारों पर उकेरी गई शिव महिमा लोगों को गहराई से आकर्षित कर रही है. जैसे ही श्रद्धालु इस स्थल पर पहुंचते हैं, उन्हें ऐसा अनुभव होता है मानो वे किसी आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर गए हों. दीवारों पर भगवान शिव के जीवन, उनके दिव्य स्वरूप और धार्मिक कथाओं को बेहद आकर्षक ढंग से चित्रित किया गया है, जो हर आगंतुक के मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत कर देता है.

छोटी काशी के नाम से प्रख्यात Gola Gokaran Nath शिव नगरी में भव्य कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से जारी है. यह भव्य शिव मंदिर कॉरिडोर 19,418.992 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जिस पर लगभग 69.15 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है. हर साल लाखों की संख्या में शिव भक्त फर्रुखाबाद और हरिद्वार जैसे स्थानों से कांवड़ लेकर इस पौराणिक शिव मंदिर में पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. यह स्थान आस्था, भक्ति और धार्मिक परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

श्रावण मास, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सुबह से लेकर देर रात तक लोग जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. इन खास अवसरों पर मंदिर परिसर की कलाकृतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाती हैं. रंग-बिरंगी रोशनी और भक्तिमय वातावरण पूरे परिसर को और अधिक दिव्य और मनमोहक बना देता है.

दीवारों पर केवल धार्मिक चित्र ही नहीं बनाए गए हैं, बल्कि शिव पुराण और अन्य धार्मिक कथाओं से जुड़े संदेश भी अंकित किए गए हैं. इससे यहां आने वाले बच्चों और युवाओं को भी धार्मिक इतिहास और भगवान शिव के महत्व की जानकारी मिल रही है. यह स्थान अब सिर्फ पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, कला और आध्यात्मिकता का संगम बन चुका है. यहां पहुंचने वाला हर व्यक्ति भगवान शिव की महिमा में खो जाता है और अपने साथ एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटता है.

राजस्थान के शिल्पकारों द्वारा रिटेनिंग दीवारों पर भगवान शिव से जुड़ी विभिन्न कथाओं और प्रसंगों को उकेरा गया है. इन कलाकृतियों में सेतुबंध रामेश्वरम, भगवान शिव परिवार, दशानन रावण की तपस्या, सप्तऋषि और गोला के शिव मंदिर की कथा को दर्शाया गया है. इसके अलावा विशाल नटराज मुद्रा में भगवान शिव की भव्य आकृति भी दीवारों पर उकेरी गई है, जो विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. साथ ही दीवारों पर शिव स्तोत्र के मंत्र भी अंकित किए जा रहे हैं, जिससे कॉरिडोर का धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण और अधिक सशक्त हो रहा है. समय के साथ शिव मंदिर कॉरिडोर का स्वरूप और भी आकर्षक होता जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था और कला का अद्भुत संगम बनता जा रहा है.

आज भी शिवलिंग पर रावण के अंगूठे का निशान प्रतीत होने की मान्यता प्रचलित है. कहा जाता है कि शिवलिंग उठाने में असमर्थ होने पर रावण ने क्रोधित होकर उसे अंगूठे से दबाया था, जिससे उस पर गाय के कान (गौ-कर्ण) के आकार का निशान और अंगूठे का चिन्ह दिखाई देता है. इसी कारण इस स्थान को गोकर्णनाथ कहा जाता है. Gola Gokaran Nath में स्थित इस पवित्र स्थल पर दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.