नोएडा के इस वैटलैंड की बदलेगी तस्वीर, ये सुविधाएं होंगी विकसित, बनाया यह खास प्लान

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नोएडा के इस वैटलैंड की बदलेगी तस्वीर, ये सुविधाएं होंगी विकसित, बनाया यह खास प्लान


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Ground Report: नोएडा के सूरजपुर वेटलैंड की अब जल्द ही तस्वीर बदलने वाली है. इसको लेकर नोएडा प्राधिकरण ने खास प्लान बनाया है. जल्द ही यह नदी-जंगल से घिरा यह खूबसूरत वैटलैंड देश विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा.

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धीरेंद्र कुमार शुक्ला/ ग्रेटर नोएडा. उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर वेटलैंड के सिस्टम को बेहतर किया जाएगा. इसको लेकर तैयारियां और प्लान बनाकर तैयार कर लिया गया है. ताकि यहां पर आने वाले पर्यटकों की संख्या को बढ़ाया जा सके. इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से रिसर्च इंस्टीट्यूट, एक्सपर्ट और एनजीओ के साथ मिलकर काम करेगा. ताकि वेटलैंड के इस इकोसिस्टम को बैलेंस करने में आ रही चुनौतियों का निपटारा किया जा सके. यहां प्रदूषण के स्तर को निम्न किया जा सके. वाटर लेवल और ग्राउंडवाटर को बढ़ाया जा सके और ऐसी वनस्पति को लगाया जाए, जो यहां पर पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर और पक्षियों के अनुकूल बना सके.

बनाया गया यह खास प्लान

जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि प्राधिकरण की तरफ से इसके लिए एक एक्शन प्लान बनाया गया है. इस एक्शन प्लान को जमीनी स्तर पर उतारने का काम एक्सपर्ट करेंगे. इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी की है. जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि यह वेटलैंड करीब 308 हेक्टेयर में फैला हुआ है. जिसमें 60 हेक्टेयर में झीलों और आद्र भूमि और 248 हेक्टेयर में जंगल शामिल है. इस वेटलैंड में सर्दियों के मौसम में साइबेरियन कंट्री से प्रभावित पक्षी आते हैं. इसके अलावा यहां भारतीय प्रजाति के पक्षी भी बहुत बड़ी संख्या में हैं. यह एक एक बायो सिस्टम है. जिसे सवारा  जाएगा. इसको बनाने के लिए पूरी तरह से प्लान बनाकर तैयार कर लिया गया है.

इन चीजों को दी जाएगी प्राथमिकता

ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में वेटलैंड का प्लान वाटर मैनेजमेंट, पॉल्यूशन कंट्रोल,बायोडायवर्सिटी और लोगों की सहभागिता पर केंद्रित है. दूसरा वेटलैंड के पूरे इकोसिस्टम से इंडस्ट्रियल वेस्ट घरेलू वेस्ट और ऐसे एलिमेंट जो इसके प्राकृतिक वास को नुकसान कर सकता है, उसे दूर रखा जाएगा. पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए 45 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित पानी को नमी वाले जगह पर छोड़ा जाएगा.

एक्सपर्ट करेंगे यह तीन काम

पहले वेटलैंड में वाटर मैनेजमेंट इसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग वाटर रोड मैनेजमेंट और ग्राउंड वाटर रिचार्ज. दूसरा वेटलैंड में पानी के नुकसान को रोकना और इकोसिस्टम को बैलेंस करना. बायो इंजीनियरिंग के जरिए ऐसी वनस्पति को उगाना. जिससे यहां पर्यावरण में नमी बनी रहे. तीसरा प्रदूषण से निपटने के लिए यहां बायोरेमेडीएशिया जैसी वैज्ञानिक तरीके का प्रयोग किया जाएगा. इसको लेकर खास प्लान बनाकर पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है अब इस पर काम किया जाएगा.

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