नोएडा सेक्टर-150 हादसे में SIT की रिपोर्ट तैयार, 80 अफसरों से की पूछताछ, युवराज मेहता केस में आज खुलेगा लापरवाही का राज!

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नोएडा सेक्टर-150 हादसे में SIT की रिपोर्ट तैयार, 80 अफसरों से की पूछताछ, युवराज मेहता केस में आज खुलेगा लापरवाही का राज!


Noida Techie Death Case: क्या सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत महज एक हादसा थी या फिर यह व्यवस्था के भ्रष्टाचार और लालच की बलि चढ़ने की एक दर्दनाक दास्तां है? नोएडा के सेक्टर-150 में हुए उस भयावह हादसे ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अब इस मामले में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच अंतिम पड़ाव पर है. SIT ने 80 से ज्यादा अधिकारियों से तीखे सवाल-जवाब किए हैं और आज यानी शनिवार को यह रिपोर्ट शासन को सौंपी जा सकती है.

SIT ने दर्ज किए 80 अधिकारियों के बयान
युवराज मेहता की मौत के मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है. शुक्रवार को नोएडा अथॉरिटी के दफ्तर में हलचल मची रही. SIT की टीम ने पुलिस, जिला प्रशासन, डिजास्टर मैनेजमेंट, NDRF, SDRF, फायर डिपार्टमेंट और नोएडा अथॉरिटी के लगभग 80 अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसआईटी की जांच का मुख्य फोकस घटना के समय की परिस्थितियों पर रहा. टीम ने कंट्रोल रूम के रिकॉर्ड्स, फील्ड स्टाफ की मौजूदगी और विभागों के बीच आपसी समन्वय की कमी से जुड़े दस्तावेजों को जब्त कर लिया है. अधिकारियों से पूछा गया है कि सूचना मिलने के बाद रिस्पांस टाइम क्या था और युवराज को बचाने के प्रयासों में कहां चूक हुई?

‘बेसमेंट’ के नाम पर निकाली अरबों की रेत
जांच में जो सबसे चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, वह है अवैध खनन का संगठित खेल. सेक्टर-150 के जिस प्लॉट (लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन को आवंटित) पर यह हादसा हुआ, वहां नियमों को ताक पर रखकर करीब 70 फीट गहरा गड्ढा खोद दिया गया था. सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से हर दिन लगभग 200 डंपर रेत बाहर भेजी जाती थी. बाजार में एक डंपर रेत की कीमत करीब 15 हजार रुपये होती है, जिसे अवैध रूप से दोगुने दामों पर बेचा जा रहा था. नियमों के अनुसार सीमित खुदाई की अनुमति थी, लेकिन बिल्डरों ने अरबों की कमाई के चक्कर में जमीन को खोखला कर दिया. यही ‘खोखली व्यवस्था’ युवराज मेहता के लिए काल बन गई.

अब चिप खोलेगी मौत का राज
हादसे वाली रात आखिर क्या हुआ था? क्या कार तेज रफ्तार में थी या फिर सड़क की संरचना में कोई बड़ी खामी थी? इन सवालों के जवाब अब युवराज की कार में लगे डैशकैम से मिलेंगे. फॉरेंसिक टीम ने डैशकैम की चिप को सुरक्षित निकालकर लैब भेज दिया है. विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि डैशकैम की फुटेज से कार की स्पीड, गिरने का एंगल और हादसे से ठीक पहले के हालात स्पष्ट हो जाएंगे. यह सबूत पुलिस की अब तक की थ्योरी को पुख्ता कर सकता है या उसे पूरी तरह खारिज भी कर सकता है.

इसके अलावा, युवराज के मोबाइल की नेटवर्क एक्टिविटी की भी जांच हो रही है. पुलिस का दावा है कि फोन रात 12:20 बजे बंद हुआ था, जबकि पिता का कहना है कि उन्होंने घंटों मदद मांगी थी. मोबाइल के डेटा लॉग से यह पता चलेगा कि क्या युवराज ने आखिरी समय में किसी को कॉल या मैसेज करने की कोशिश की थी.

बिल्डरों पर एक्शन और डायरेक्टर फरार
इस पूरे मामले में अब तक रियल एस्टेट कंपनी के तीन डायरेक्टर्स को गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि, मुख्य आरोपी और लोटस ग्रीन के डायरेक्टर निर्मल सिंह अभी भी फरार हैं, जिनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है. शासन की ओर से सख्त निर्देश हैं कि जो भी अधिकारी इस अवैध खनन और लापरवाही में शामिल पाया जाएगा, उस पर गाज गिरना तय है.

एक और लापरवाही: मोदीनगर में भी नाले में गिरे भाई-बहन
प्रशासनिक लापरवाही का आलम सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं है. मोदीनगर में भी दिल्ली-मेरठ मार्ग पर एक टूटी पुलिया के कारण स्कूटी सवार भाई-बहन गहरे नाले में गिर गए. अंधेरे में पुलिया न दिखने के कारण स्कूटी अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरी. स्थानीय लोगों की मदद से एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला गया, जहां बहन की हालत गंभीर बनी हुई है. ये घटनाएं दर्शाती हैं कि शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार के दावे धरातल पर कितने खोखले हैं.



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