नोट छापने की मशीन है ये ऑस्ट्रेलियाई पौधा, कहीं भी लगा सकते हैं इसे, बिना देखभाल ही तैयार हो जाता है
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Agri Tips : इसका पौधा रोपाई के 6 साल बाद तैयार हो जाता है. इसके लिए किसी अतिरिक्त खर्च की जरूरत नहीं पड़ती है. लोकल 18 से बातचीत में रायबरेली के कृषि विशेषज्ञ शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि इस पौधे को सह फसली खेती के तौर पर भी उगाया जा सकता है. खेत की मेड़ पर लगा देने से ये दूसरी फसलों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है.
अगर आप खेती किसानी के साथ अतिरिक्त कमाई करना चाहते हैं तो आपके लिए कृषि विशेषज्ञ की ये सलाह जानना बेहद जरूरी है. अगर खेती करने वाले किसान अपनी मेड़ किनारे यूकेलिप्टस का पौधा लगा दें तो ये कम लागत में बहुत अच्छा मुनाफा देगा.

किसान अपनी फसल के साथ यूकेलिप्टस के पौधे को भी तैयार करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी लकड़ी का प्रयोग इमारती लकड़ी, फर्नीचर बनाने और दूसरे घरेलू सामान बनाने के अलावा औद्योगिक इकाइयों में भी किया जाता है.

यूकेलिप्टस का पौधा ऑस्ट्रेलियाई मूल का है, जो कम समय में तेजी से ग्रोथ करता है. इस पौधे को अन्य फसलों के साथ आसानी से तैयार किया जा सकता है. इसे अलग-अलग क्षेत्रों में कई दूसरे नामों गम, सफेदा और नीलगिर के नाम से भी जाना जाता है .
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यूकेलिप्टस की लकड़ी का इस्तेमाल ईंधन, पेटियां, हार्ड बोर्ड, लुगदी, फर्नीचर और पार्टिकल बोर्ड के रूप में उपयोग किया जाता है. किसान अपनी खाली पड़ी जमीन या खेत के किनारे मेड़ पर लगाकर इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

यूकेलिप्टस के पौधे को लगाने के लिए सबसे पहले तैयारी करनी होती है. इसे खेत में लगाने के लिए एक मीटर चौड़ा 1 मीटर लंबा और 1 मीटर गहरा गड्ढा खोदकर उसकी मिट्टी बाहर निकाल दें. इसके बाद एक तिहाई मिट्टी एक तिहाई गोबर की सड़ी हुई खाद और समान मात्रा में बालू मिलाकर उसमें फंगीसाइड मिलते हुए गड्ढे को भर दें. गड्ढे में मिट्टी भरते समय 1 किलोग्राम में एनपीके खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं. गड्डे से गड्ढे के बीच की दूरी 2 मीटर होनी चाहिए.

यूकेलिप्टस का पौधा रोपाई के 6 वर्षों बाद तैयार हो जाता है. इसके लिए किसी अतिरिक्त खर्च की जरूरत नहीं पड़ती है. इसे सह फसली खेती के तौर पर भी उगाया जा सकता है. खेत की मेड़ पर लगा देने से ये दूसरी फसलों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है.