पारंपरिक खेती छोड़ अपनाएं श्री विधि, धान की फसल से होगा मोटा मुनाफा

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पारंपरिक खेती छोड़ अपनाएं श्री विधि, धान की फसल से होगा मोटा मुनाफा


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पारंपरिक खेती छोड़ अपनाएं श्री विधि, धान की फसल से होगा मोटा मुनाफा

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SRI vidhi se dhan ki kheti: धान की पारंपरिक खेती छोड़ ‘श्री विधि’ (SRI Technique) अपनाकर किसान कम पानी, कम बीज और न्यूनतम लागत में सामान्य से कई गुना अधिक उपज ले रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता के अनुसार, इस वैज्ञानिक विधि में मात्र 10-12 दिन की छोटी नर्सरी और पौधों के बीच 25 सेमी की उचित दूरी रखकर बंपर पैदावार और मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है.

मुरादाबाद: श्री विधि से धान की बुवाई किसानों के लिए पारंपरिक तरीकों से कहीं बेहतर साबित हो रही है. इस वैज्ञानिक तकनीक में कम बीज, कम पानी और कम लागत में सामान्य से अधिक पैदावार मिलती है. इस विधि में कम उम्र के पौधे लगाए जाते हैं और खेत में उचित दूरी रखी जाती है, जिससे पौधों को हवा और धूप बेहतर मिलती है. इससे पौधे मजबूत होते हैं और उत्पादन बढ़ता है. कम संसाधनों में ज्यादा उपज होने से किसानों का खर्च घटता है और मुनाफा बढ़ता है. यही कारण है कि श्री विधि अपनाकर किसान कम मेहनत में अच्छी कमाई कर रहे हैं.

10 से 12 दिन की नर्सरी है सबसे फायदेमंद
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि एसआरआई विधि मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के लिए है, जहां पर बलुई दोमट मिट्टी हो और खेत को थोड़ा ढालू बनाना पड़ता है. इसके साथ ही खेत के अंदर ही हम नर्सरी तैयार करेंगे. नर्सरी मात्र 10 से 12 दिन की डालेंगे. जितनी छोटी नर्सरी डालेंगे, वह उतनी ही ज्यादा फायदेमंद होगी और उतनी ही ज्यादा पैदावार निकलकर आएगी. 10 से 12 दिन के अंदर पौध तैयार कर लें. जब पौध निकल आएगी तो उसके अंदर हल्के यूरिया का स्प्रे कर दें, जिससे पौध की बढ़वार थोड़ी तेज हो जाती है. खेत में पानी बहुत ज्यादा खड़ा नहीं करते हैं, बल्कि हल्का पानी रखते हैं और पौध का रोपण कर देते हैं. इसके साथ ही 25 सेंटीमीटर पौधे से पौधे की दूरी और 25 सेंटीमीटर लाइन से लाइन की दूरी रखते हुए इसकी पौध लगाते हैं.

निराई-गुड़ाई की आधुनिक तकनीक और बंपर पैदावार का गणित
इसके साथ ही फालतू पानी को खेत में से निकाल देते हैं. फिर बाद में निराई-गुड़ाई करने के लिए एक हाथ वाली मशीन आती है, उससे निराई-गुड़ाई करते रहें. इस मशीन का प्रयोग करने से हानिकारक जीवाणु मर जाते हैं और धान की फसल में पैदावार अच्छी निकलकर आती है, जिससे फसल बेहद ताकतवर हो जाती है. इस प्रकार एसआरआई विधि के अंदर जब हम छोटा पौधा लगाते हैं, तो सामान्य पौधे के मुकाबले इसमें ज्यादा, लगभग 50 से 60 कल्ले (किले) निकल आते हैं, जिससे पैदावार बेहतरीन होती है. इस विधि से धान की खेती करने में किसान को बहुत फायदा है; एक तो बीज बहुत कम लगता है और दूसरा उत्पादन कई गुना निकलकर आता है. इसलिए किसान इस विधि का प्रयोग करके आगे की धान की फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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