‘फर्राटेदार अमेरिकन इंग्लिश, VoIP कॉलिंग और…’ 12000KM दूरी करोड़ों का गेम

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‘फर्राटेदार अमेरिकन इंग्लिश, VoIP कॉलिंग और…’ 12000KM दूरी करोड़ों का गेम


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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़े इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है. क्राइम ब्रांच ने ‘ऑपरेशन CY Vajra’ के तहत सुशांत गोल्फ सिटी के ओमेक्स R-2 अपार्टमेंट में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये शातिर ठग अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर में वायरस भेजकर उन्हें माइक्रोसॉफ्ट या फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) का अधिकारी बनकर डराते थे और फिर गिफ्ट कार्ड्स के जरिए लाखों रुपये ऐंठ लेते थे. ठगी की यह रकम हवाला के जरिए भारत आती थी. आरोपियों का मास्टरमाइंड अहमदाबाद से पूरा खेल चला रहा था.

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लखनऊ में इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने एक ऐसे इंटरनेशनल साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार सीधे अमेरिका से जुड़े हुए हैं. लखनऊ क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन CY Vajra के तहत सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र के हाई-प्रोफाइल ओमेक्स R-2 अपार्टमेंट में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने मौके से 7 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है, जो सात समंदर पार बैठे अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाते थे.

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मुख्य रूप से अहमदाबाद निवासी पुनीत वर्मा और दीपेन पटेल शामिल हैं. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे इंटरनेशनल सिंडिकेट का मास्टरमाइंड पुनीत का भाई है, जो फिलहाल अहमदाबाद में छिपकर इस पूरे गोरखधंदे को ऑपरेट कर रहा है.

कैसे बिछाते थे ठगी का डिजिटल जाल?
ये ठग वीओआईपी (VoIP) कॉलिंग और स्पेशल कॉलिंग सॉफ्टवेयर (IBM) का इस्तेमाल करते थे. इनका काम करने का तरीका बेहद हाईटेक और शातिराना था-

  • मैलवेयर और पॉप-अप: ये ठग अमेरिकी नागरिकों के लैपटॉप या डेस्कटॉप में वायरस और मैलवेयर भेजकर एक फर्जी पॉप-अप जनरेट करते थे, जिसमें मदद के लिए एक टोल-फ्री नंबर दिया होता था.
  • माइक्रोसॉफ्ट का फर्जी सपोर्ट: घबराकर जब पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता, तो ये खुद को माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट या साइबर सिक्योरिटी का अधिकारी बताते थे.
  • डेटा चोरी का डर: पीड़ितों को झांसा दिया जाता था कि उनके बैंक खाते, सोशल सिक्योरिटी नंबर या डिजिटल वॉलेट को हैक कर लिया गया है और उसका इस्तेमाल गंभीर अपराधों में हो रहा है.

‘डॉयलर’ फंसाते थे, ‘क्लोजर’ करते थे वसूली
कॉल सेंटर को कॉरपोरेट स्टाइल में ‘डॉयलर’ और ‘क्लोजर’ दो टीमों में बांटा गया था. डॉयलर टीम का काम विदेशियों से संपर्क कर उन्हें जाल में फंसाना था. इसके बाद कॉल क्लोजर टीम को ट्रांसफर होती थी. ये खुद को फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाते थे. डराने के लिए गूगल से एडिट की गई आईडेंटिटी थेफ्ट रिपोर्ट, FTC लेटर और फर्जी एग्रीमेंट भी ईमेल किए जाते थे.

अमेरिकियों को लगाते थे चूना

हवाला के जरिए भारत आती थी काली कमाई
डरे हुए पीड़ितों के लैपटॉप का एक्सेस (टीम व्यूअर आदि से) लेकर ये ठग उनके पासवर्ड चुराते थे. फिर अमेजॉन और वॉलमार्ट के गिफ्ट कार्ड खरीदे जाते थे. इन कार्ड्स को अमेरिका में मौजूद इनके वेंडर रिडीम कर कैश में बदलते थे. बाद में यही काली कमाई हवाला नेटवर्क के जरिए भारत भेजी जाती थी.

विदेशी लहजे में करते थे बात
गिरफ्तार किए गए सभी 7 आरोपी फर्राटेदार अमेरिकन एक्सेंट (विदेशी लहजे) में अंग्रेजी बोलते हैं, जिससे किसी भी अमेरिकी नागरिक को इन पर शक नहीं होता था. इस डिजिटल डकैती के बदले इन कॉलर लड़कों को सैलरी के अलावा ठगी गई कुल रकम का 10 से 15 फीसदी मोटा इंसेंटिव (कमीशन) भी मिलता था. फिलहाल पुलिस इनके बाकी नेटवर्क और बैंक खातों को खंगालने में जुटी है.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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