फैल जाएगा रोग, जा सकती है जान…बरसात में पशुओं को बचाने का ये आखिरी मौका

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फैल जाएगा रोग, जा सकती है जान…बरसात में पशुओं को बचाने का ये आखिरी मौका


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फैल जाएगा रोग, जा सकती है जान…बरसात में पशुओं को बचाने का ये आखिरी मौका

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Animal husbandry : मानसून की दस्तक के साथ पशुपालकों की धड़कने बढ़ने लगी हैं. ये मौसम पशुओं के लिए राहत भी है और आफत भी, लेकिन खतरे के चांस ज्यादा हैं. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. दिवाकर कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि जरा सी चूक पशुपालकों को तगड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. वे बताते हैं कि बरसात के मौसम में पशुओं का रोजाना निरीक्षण करते रहें. अगर पशु को बुखार, खांसी, दस्त, भूख कम लगना या खुर में सूजन जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. जानवरों के तबेले को सूखा और साफ रखें. बिछावन के लिए सूखा भूसा, पुआल या फिर लकड़ी का बुरादा बिछा दें. गीला होने पर बदलते रहे.

सुल्तानपुर. मानसून की दस्तक के साथ बारिश का मौसम शुरू हो चुका है. इस मौसम में न सिर्फ इंसानों को अपने दैनिक जीवन में बदलाव करना पड़ता है, बल्कि जानवरों के आवास प्रबंधन में भी परिवर्तन जरूरी हो जाता है. अगर बारिश के इस मौसम में जानवरों के रहने की उचित व्यवस्था न की जाए तो काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है. पशुओं को संक्रमण जैसी कई बीमारियां लग सकती हैं. कुछ बीमारियां इतनी खतरनाक होती हैं कि उससे जानवरों की मौत भी हो जाती है. आज हम पशु वैज्ञानिक से जानेंगे कि बारिश के मौसम में हमें पशुओं का आवास प्रबंध कैसे करना चाहिए.

पशुशाला को ऐसा रखें 
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. दिवाकर कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि बारिश के इस मौसम में पशुओं के आवास का प्रबंधन सही तरीके से करना चाहिए. इसके लिए पशुपालकों को अपने जानवरों के तबेले को सूखा और साफ रखना चाहिए क्योंकि बारिश के मौसम में कीचड़ अधिक होता है. ऐसे में बैक्टीरिया के पनपने की संभावना रहती है. इस वजह से पशुशाला को हमेशा साफ रखना चाहिए. तबेले की फर्श थोड़ा ऊंचा रखें और पानी निकासी की सही व्यवस्था करें. बिछावन के लिए सूखा भूसा, पुआल या फिर लकड़ी का बुरादा बिछा दें. जब ये गीला हो जाए तो तुरंत बदल दें.

इससे पशुओं का करें बचाव
बारिश के दौरान पशुओं को खुले में लंबे समय तक नहीं छोड़ना चाहिए. पशुशाला की छत मजबूत और ऐसी बनी हो कि पानी अंदर न टपकने पाए. चारों ओर हवा का आदान-प्रदान होता रहे, इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए. पशुओं को सूखा चारा खिलाएं और हरा चारा भी साफ करके दें. पीने का पानी हमेशा स्वच्छ रखें. बरसात में मच्छर और कीड़ों की संख्या बढ़ जाती है, इसलिए समय-समय पर दवा का छिड़काव करते रहना चाहिए.

रोज करें ये काम
डॉ. दिवाकर के मुताबिक, बरसात के मौसम में पशुओं का रोजाना निरीक्षण करते रहें. अगर पशु को बुखार, खांसी, दस्त, भूख कम लगना या खुर में सूजन जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवा अवश्य दिलाएं. पशुशाला के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों और संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बनता है. सही आवास, साफ-सफाई और नियमित देखभाल से बरसात के मौसम में पशु स्वस्थ रहते हैं और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान नहीं होता.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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