बंगाल-बिहार की राह पर UP, महिला वोटर बनेगी ढाल, कैबिनेट विस्तार में दिखेगी झलक

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बंगाल-बिहार की राह पर UP, महिला वोटर बनेगी ढाल, कैबिनेट विस्तार में दिखेगी झलक


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Yogi Cabinet Expansion BJP Eyes Women Vote Bank: यूपी में योगी मंत्रिमंडल विस्तार को 2027 रणनीति से जोड़ा जा रहा है. बीजेपी महिला वोटर्स और दलित नेता कृष्णा पासवान जैसे चेहरों से नया सामाजिक समीकरण साधने में जुटी है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र में महिला वोटर्स के दम पर भाजपा को मिली शानदार जीत है.

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कृष्णा पासवान को आज योगी कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है.

Yogi Cabinet Expansion BJP Eyes Women Vote Bank: उत्तर प्रदेश में होने जा रहा योगी मंत्रिमंडल विस्तार केवल राजनीतिक संतुलन साधने की कवायद नहीं है, बल्कि यह 2027 विधानसभा चुनाव की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. खास बात यह है कि इस बार बीजेपी का सबसे बड़ा फोकस महिला वोटर्स पर दिखाई दे रहा है. बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में महिलाओं के बीच मिली मजबूत राजनीतिक बढ़त ने बीजेपी को यह संदेश दिया है कि आने वाले चुनावों में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं. यही वजह है कि योगी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार में दलित समुदाय की महिला नेता कृष्णा पासवान को मंत्री बनाए जाने की चर्चा को बेहद अहम माना जा रहा है.

बीजेपी के अंदरूनी रणनीतिकार मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में महिला वोटिंग पैटर्न तेजी से बदला है. पहले महिलाओं का मतदान अक्सर परिवार या जातीय समीकरणों से प्रभावित माना जाता था, लेकिन अब महिला मतदाता अपने हितों, सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व के आधार पर फैसला लेने लगी हैं. बीजेपी ने इसी बदलाव को समय रहते पहचान लिया.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता तक तो नहीं पहुंच पाई, लेकिन महिला वोट प्रतिशत में पार्टी को बड़ी बढ़त मिली थी. वहीं बिहार में नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति और महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं का असर चुनावी नतीजों में साफ दिखा. महाराष्ट्र में भी लाडली बहन जैसी योजनाओं और महिला सुरक्षा के मुद्दों ने बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को फायदा पहुंचाया. अब बीजेपी इसी मॉडल को उत्तर प्रदेश में और आक्रामक तरीके से लागू करना चाहती है.

महिला वोटर्स पर भाजपा का फोकस

उत्तर प्रदेश में पहले से ही मुख्यमंत्री योगी की सरकार महिला सुरक्षा और कल्याण को लेकर लगातार योजनाएं गिनाती रही है. मिशन शक्ति, कन्या सुमंगला योजना, उज्ज्वला योजना और महिला स्वयं सहायता समूहों के विस्तार जैसे मुद्दों को बीजेपी लगातार राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बनाती रही है. पार्टी का दावा है कि कानून-व्यवस्था में सुधार और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उसकी सरकार की छवि मजबूत हुई है.

अब कैबिनेट विस्तार में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का कदम इसी रणनीति का अगला चरण माना जा रहा है. योगी सरकार में पहले से पांच महिला मंत्री मौजूद हैं, लेकिन कृष्णा पासवान जैसे दलित महिला चेहरे को शामिल करने का संदेश केवल महिला प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है. इसके जरिए बीजेपी एक साथ दलित और महिला- दो बड़े सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश कर रही है.

पीडीए समीकरण को जवाब

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को जवाब देने के लिए बीजेपी अब महिला प्लस सामाजिक प्रतिनिधित्व का नया फॉर्मूला तैयार कर रही है. बीजेपी का आकलन है कि महिला वोट बैंक जातीय ध्रुवीकरण को काफी हद तक संतुलित कर सकता है. इसी रणनीति को लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम से भी जोड़कर देखा जा रहा है. बीजेपी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मामले में वही सबसे आगे है. पार्टी विपक्ष पर हमला करते हुए यह भी कहती रही है कि महिला आरक्षण बिल दशकों तक लंबित रहा, लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार ने इसे कानून का रूप दिया.

उत्तर प्रदेश में महिला वोटरों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है और कई सीटों पर महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों के बराबर या उससे अधिक पहुंच चुका है. ऐसे में बीजेपी के लिए यह वर्ग केवल सामाजिक नहीं, बल्कि सीधा चुनावी निवेश बन गया है. यही कारण है कि योगी कैबिनेट विस्तार को केवल सत्ता संतुलन के नजरिए से नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे 2027 की चुनावी बिसात पर महिला वोटर्स को केंद्र में रखकर बनाई जा रही बड़ी रणनीति का ट्रेलर माना जा रहा है. आने वाले महीनों में यह और साफ होगा कि बीजेपी महिला प्रतिनिधित्व, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक समीकरणों के सहारे यूपी में अपनी सत्ता बचाने की रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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