बच्चों के गले में चांदी का चंद्रमा क्यों पहनाते हैं? ज्योतिष ने बताए फायदे

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बच्चों के गले में चांदी का चंद्रमा क्यों पहनाते हैं? ज्योतिष ने बताए फायदे


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बच्चों के गले में चांदी का चंद्रमा क्यों पहनाते हैं? ज्योतिष ने बताए फायदे

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Ayodhya News: आपने देखा होगा कि छोटे बच्चों के गले में चंद्रमा की लॉकेट पहनाई जाती है. क्या आपने कभी सोचा कि आखिर उन्हें ये लॉकेट क्यों पहनाई जाती है. आइए ज्योतिष से इसके सकारात्मक परिणाम के बारे में आपको बताते हैं.

अयोध्या: भारतीय परंपरा में चांदी को बेहद शुभ और सात्विक धातु माना गया है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चांदी का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, जो मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का कारक ग्रह है. यही कारण है कि छोटे बच्चों को चांदी का चंद्रमा आकार का लॉकेट पहनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. हालांकि यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है, ऐसी स्थिति में क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों छोटे बच्चों को चांदी का चंद्रमा धारण कराया जाता है. क्या है इसके पीछे धार्मिक लॉजिक चलिए जानते हैं.

अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, चांदी की धातु बच्चों के मन को शांत रखने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाली मानी जाती है. उनका कहना है कि बचपन में बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास तेजी से होता है. इसलिए चंद्रमा का प्रतीक चांदी का लॉकेट पहनाने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे बच्चे का स्वभाव शांत रहता है और मन में सकारात्मक विचार विकसित होते हैं.

एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चांदी का चंद्रमा बढ़ते बच्चों में एकाग्रता बढ़ाने, गुस्से को नियंत्रित करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है. यह भी माना जाता है कि चंद्रमा का प्रतीक होने के कारण यह भावनात्मक स्थिरता और स्मरण शक्ति के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाता है.

धार्मिक मान्यता यह भी है कि नवजात और छोटे बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए चांदी का चंद्रमा पहनाया जाता है. ज्योतिष में इसे नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का प्रतीक माना गया है. कई परिवार इस लॉकेट को काले धागे या चांदी की चेन में पहनाते हैं, ताकि यह बच्चे के शरीर के संपर्क में बना रहे.

शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का करता संचार
पंडित कल्कि राम के अनुसार, चांदी को ऐसी धातु माना जाता है जो शरीर की सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने में सहायक होती है. इसी वजह से इसे बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए शुभ माना जाता है. हालांकि चिकित्सा विज्ञान इन दावों की पुष्टि नहीं करता और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, नियमित देखभाल और डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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