मजदूर पिता की बेटी ने किया कमाल, 10वीं में 95.33% अंक लाकर चांदनी बनी टॉपर

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मजदूर पिता की बेटी ने किया कमाल, 10वीं में 95.33% अंक लाकर चांदनी बनी टॉपर


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बलिया की चांदनी चौहान ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद 10वीं बोर्ड परीक्षा में 95.33% अंक हासिल कर जिला टॉप किया. मजदूर पिता और सीमित संसाधनों के बीच वह रोज सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करती थी, साथ ही घर और खेत के कामों में भी हाथ बंटाती थी. बिना ट्यूशन और मोबाइल के सहारे चांदनी ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया और अब वह आईएएस बनकर अपने सपनों को साकार करना चाहती है.

बलिया: ‘काग चेष्टा, बको ध्यानं, स्वान निद्रा तथैव च…’ संस्कृत का यह श्लोक जानवरों की खूबियों का उदाहरण देते हुए होनहार विद्यार्थियों के लिए रचा गया है और यह श्लोक हाईस्कूल की एक छात्रा पर बिल्कुल सटीक बैठता है. मशीन से पशुओं के लिए चारा काटती इस लड़की को देखकर आप किसी मुगालते में मत रहिएगा कि यह कोई बाल श्रमिक है, बल्कि परिवार की गरीबी उसे पढ़ाई के साथ-साथ खेती-बाड़ी के काम और पशुओं के चारे की व्यवस्था करने के लिए मजबूर करती है.

जिले में टॉप

पढ़ाई में उसकी प्रतिभा का अंदाजा यूपी बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा में हासिल किए गए अंकों से लगाया जा सकता है. चांदनी चौहान ने 60, 70 या 80 प्रतिशत नहीं, बल्कि 95.33 प्रतिशत अंक हासिल कर बलिया जनपद में टॉप किया है.

पिता करते हैं मजदूरी

बलिया जनपद के नगरा थाना से 10 किलोमीटर दूर करौदी गांव निवासी 10वीं की छात्रा चांदनी चौहान ने बताया कि वह आर्य भट्ट झाकारी इंटर कॉलेज में पढ़ती हैं. उनके परिवार में माता-पिता, दो भाई और दो बहनें हैं. पिता मनोज कुमार चौहान मजदूरी कर घर चलाते हैं. चांदनी रोज सुबह चार बजे उठ जाती थी और मन लगाकर पढ़ाई करती थी. इसके बाद स्कूल जाती और लौटने के बाद थोड़ा आराम कर बाहर टहलती थी. फिर शाम पांच बजे से दोबारा पढ़ाई शुरू कर देती थी. इस तरह वह कुल मिलाकर लगभग छह से सात घंटे पढ़ाई करती थी. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चांदनी ने न तो ट्यूशन लिया और न ही मोबाइल का सहारा लिया. जिला टॉप करने के सवाल पर उसने कहा कि उसे खुद पर विश्वास था और पूरा परिवार उसकी पढ़ाई में सहयोग करता है.

बेटी को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगे

बच्ची की मां रमिता देवी ने कहा कि बेटी की सफलता की खबर सुनकर उन्हें बहुत खुशी हुई है और वे उसे आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगी. उन्होंने बताया कि वे गाय-भैंस पालकर और दूध बेचकर बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाती हैं. पिता मनोज चौहान ने कहा कि वे एक मजदूर हैं और अपनी क्षमता के अनुसार बेटी को पढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि चांदनी बहुत समझदार है और लगन से पढ़ाई करती है, उसे कभी पढ़ने के लिए कहना नहीं पड़ता.

आईएएस बनना चाहती हैं चांदनी

चांदनी ने बताया कि वह आगे चलकर आईएएस बनना चाहती है. पढ़ाई के साथ-साथ वह घर का झाड़ू-पोछा, खाना बनाना और माता-पिता के साथ खेत में काम भी करती है.

स्कूल ने पूरी फीस की माफ

स्कूल के प्रबंधक हरेराम चौहान ने कहा कि आज उन्हें बहुत गर्व और खुशी हो रही है कि उनके स्कूल से ऐसी प्रतिभावान छात्रा निकली है. उन्होंने बताया कि जब चांदनी ने कक्षा आठ में प्रवेश लिया था, तभी उसके उत्साह को देखकर शिक्षक प्रभावित हो गए थे और उसे पढ़ाने में विशेष रुचि लेने लगे थे. स्कूल को उम्मीद थी कि यह छात्रा प्रदेश स्तर पर टॉप करेगी, लेकिन कहीं न कहीं थोड़ी कमी रह गई. उन्होंने कहा कि इस बच्ची में अपार प्रतिभा है और यह मिट्टी के घर में रहकर भी अपना सपना आईएएस बनने का जरूर पूरा करेगी. चांदनी की आर्थिक स्थिति को देखते हुए स्कूल ने उसकी पूरी फीस माफ कर दी थी.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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