मथुरा में 40 दिवसीय फाग महोत्सव की धूम, आज से उड़ेगा अबीर-गुलाल

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मथुरा में 40 दिवसीय फाग महोत्सव की धूम, आज से उड़ेगा अबीर-गुलाल


Agency:News18 Uttar Pradesh

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Basant Panchami 2025: बसंत पंचमी पर होली का डांडा गड़ने के बाद 3 फरवरी से ब्रज में 40 दिवसीय फाग महोत्सव की धूम शुरू हो जाती है. इधर बरसाना में राधारानी के चरणों में गुलाल अर्पित होगा तो उधर वृंदावन में ठाकुर ब…और पढ़ें

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वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी फेंटा बांधकर हजारों भक्तों के साथ खेलेंगे होली

हाइलाइट्स

  • बसंत पंचमी से ब्रज में 40 दिवसीय फाग महोत्सव शुरू.
  • वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी के साथ अबीर-गुलाल की होली.
  • बरसाना में राधारानी के चरणों में गुलाल अर्पित होगा.

मथुरा: ब्रज में होली का एक अपना ही अलग ही महत्व है. यहां होली का पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन से ही ब्रज में होली उत्सव की शुरुआत हो जाती है. ब्रज के बृजवासी और यहां के मंदिर होली के रंग में रंगना शुरू हो जाते हैं. बसंत पंचमी पर फाग उत्सव जैसे ही शुरू होता है, तो मथुरा वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में होली भगवान अपने भक्तों के साथ खेलते हैं.

बसंत पंचमी से शुरू होगा फाग उत्सव 

बसंत पंचमी पर होली का डांडा गड़ने के बाद 3 फरवरी से ब्रज में 40 दिवसीय फाग महोत्सव की धूम शुरू हो जाएगी. इधर बरसाना में राधारानी के चरणों में गुलाल अर्पित होगा, तो उधर वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी फेंटा बांधकर हजारों भक्तों के साथ अबीर-गुलाल की होली खेलकर ब्रज में होली का आगाज करेंगे. इसके बाद धीरे-धीरे ब्रज के मंदिरों में होली की धूम शुरू हो जाएगी, जो 7 मार्च को रंगभरनी एकादशी से परवान चढ़ जाएगी.

40 दिवसीय होली का आयोजन

बता दें कि बसंत पंचमी दुनियां भर में सरस्वती पूजन और बसंत ऋतु के आगमन के रूप में मनाया जाता है, लेकिन ब्रजभूमि में 40 दिवसीय होली उत्सव का आगाज करने वाला होता है. बसंत को लेकर ब्रज के मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गयी हैं. खासकर, बरसाना और वृंदावन में इस दिन आस्था का रेला का उमड़ेगा. पहले दिन राधारानी के चरणों में गुलाल अर्पित किया जाएगा. इसी के साथ मंदिर में होली का डांढा गाड़ा जाएगा.

उधर वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी महाराज के दर्शन करने के साथ भक्तकुंज गलियों में होली का आनंद उठायेंगे. रंग-बिरंगी पोशाक में विराजमान ठाकुरजी को गुलाल अर्पित कर पंच मेवा युक्त केसरिया मोहनभोग का भोग लगाया जाएगा. ब्रज की मंदिरों में बसंत पंचमी के दिन से ही अबीर रंग और गुलाल उड़ाना शुरू हो जाता है. यहां इस फाग उत्सव में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से श्रद्धालु इस फाग उत्सव का आनंद लेने के लिए बज पहुंचते हैं.

बृज के मंदिरों में शुरू हो जाती है फाग की चौपाई 

बिहारीजी के साथ ठाकुर राधाबल्लभ, ठाकुर राधामदनमोहन, ठाकुर राधारमणलाल, ठाकुर राधादामोदर आदि प्राचीन देवालयों में भी ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार कर फाग उत्सव मनाया जाएगा. भारत विख्यात द्वारिकाधीश मंदिर में भी ढप बज उठेंगे. इसके बाद 28 फरवरी को शिवरात्रि पर बरसाना में होली की प्रथम चौपाई निकाली जाएगी.

पद्मश्री मोहन स्वरूप से सुनिए होली के मायने

पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने होली के उसे प्राचीन उत्सव को लोकल 18 से बातचीत के दौरान सांझा किया. उन्होंने बताया कि होली का पर्व भगवान राधा कृष्ण से जुड़ा हुआ है. सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्णा और राधा ने ब्रज में होली खेली थी और भगवान श्री कृष्ण के जो शखा बरसाना नंद गांव से होली खेलने के लिए गए थे.

विदेशों से भी खेलने पहुंचते हैं लोग

होली का वह पवित्र बंधन राधा कृष्ण का प्रीत का बंधन है और आज भी द्वापर युग से उस परंपरा को यहां के लोग निभाते चले आ रहे हैं. होली में रंगों का मिश्रण होता है. वह मिश्रण रंगों के साथ एक अलग ही पहचान अपनी रखता है. सतरंगी रंग होली का रंग होता है और यहां हर कोई भगवान श्री कृष्णा और राधा के साथ होली खेलने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से आता है.

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