महापुरुषों के नाम पर स्कीम… मूर्तियां और उनका सम्मान… सपा के PDA की बीजेपी ने कैसे खोजी काट?
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UP Politics: बीजेपी ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव के लिए सपा के पीडीए फॉर्मूले को काउंटर करने हेतु महापुरुषों के नाम पर योजनाएं शुरू की हैं. योगी सरकार ने चौधरी चरण सिंह, अहिल्या बाई होल्कर, सुहेलदेव राजभर और डॉ….और पढ़ें
सीएम योगी आदित्यनाथ.
हाइलाइट्स
- बीजेपी ने सपा के पीडीए फॉर्मूले को काउंटर करने की योजना बनाई.
- महापुरुषों के नाम पर योजनाएं और मूर्तियों की स्थापना की जा रही है.
- 2027 चुनाव में बीजेपी और सपा के बीच कड़ा मुकाबला होगा.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को काउंटर करने के लिए एक नया एक्शन प्लान तैयार किया है. बीजेपी का यह कदम न केवल सपा की रणनीति को कमजोर करने की दिशा में है, बल्कि जातियों में बंटे हिंदुओं को एकजुट कर अपनी जीत सुनिश्चित करने की भी कोशिश है.
बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने मिलकर 2027 के लिए रोडमैप तैयार किया है, जिसमें अलग-अलग जातियों के महापुरुषों को सम्मान देना और उनके नाम पर योजनाएं शुरू करना शामिल है. योगी सरकार ने इस रणनीति के तहत कई कदम उठाए हैं, जैसे लखनऊ में चौधरी चरण सिंह के नाम पर सीड पार्क का निर्माण, अहिल्या बाई होल्कर और सुहेलदेव राजभर की प्रतिमाएं स्थापित करना, और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर विभिन्न योजनाएं शुरू करना.
लोकसभा चुनाव में पीडीए ने बीजेपी को दिया था झटका
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए फॉर्मूले ने बीजेपी को कड़ा झटका दिया था, जब सपा ने 37 सीटें जीतकर बीजेपी को 33 सीटों पर सीमित कर दिया था. इसके बाद से बीजेपी इस फॉर्मूले का तोड़ निकालने में जुटी हुई है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीजेपी का मानना है कि हिंदू एकता को मजबूत करने और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने से सपा के जाति-आधारित समीकरण को कमजोर किया जा सकता है.
महापुरुषों के नाम योजनाओं की शुरुआत
इसके तहत, बीजेपी ने अहिल्या बाई होल्कर के 300वें जन्मशती अभियान को भी बड़े स्तर पर शुरू किया है. हाल ही में, बीजेपी ने घोषणा की कि नई शिक्षा नीति में देवी अहिल्या बाई होल्कर के योगदान को शामिल किया जाएगा, ताकि बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास हो सके. इसके अलावा, योगी सरकार ने हिंदुत्व के एजेंडे को और धार देते हुए “बंटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो सेफ रहोगे” जैसे नारे दिए हैं, जिसे हिंदुओं को एकजुट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
सपा ने लगाया समाज को बांटने का आरोप
सपा, जो 2024 में अपने पीडीए फॉर्मूले की सफलता के बाद इसे और मजबूत करने में जुटी है, ने बीजेपी की इस रणनीति पर सवाल उठाए हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा कि बीजेपी की यह रणनीति सिर्फ दिखावा है और असल में वह समाज को बांटने का काम कर रही है. दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी एजेंडे के जरिए सभी वर्गों को जोड़ने का काम कर रही है. सियासी जानकारों का मानना है कि 2027 का चुनाव बीजेपी के हिंदुत्व और सपा के पीडीए फॉर्मूले के बीच एक बड़ा मुकाबला होगा. बीजेपी की यह रणनीति कितनी कारगर होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल दोनों पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं.

Principal Correspondent, Lucknow