‘मायावती से मिलने का चार्ज 5 लाख, टिकट के बदले 3.5 करोड़’, मीडिया में ऐसी खबरें क्यों?

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‘मायावती से मिलने का चार्ज 5 लाख, टिकट के बदले 3.5 करोड़’, मीडिया में ऐसी खबरें क्यों?


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यूपी चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) कमर कसती दिख रही है. इसी बीच मीडिया में बीएसपी के खिलाफ पैसे लेकर टिकट बेचने की खबरें मीडिया में आ गई हैं. एक स्टिंग ऑपरेशन को आधार बनाकर खासकर सोशल मीडिया पर तमाम ऐसी खबरें चलाई जा रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि मायावती से केवल मिलने का चार्ज पांच लाख रुपये है. वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि बीएसपी में टिकट मिलने का रेट साढ़े तीन करोड़ रुपये तक है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चुनाव से ठीक पहले बीएसपी को लेकर इस तरह की खबरें कहां से आ रही हैं.

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यूपी चुनाव 2027 से पहले बीएसपी और मायावती पर गंभीर आरोप.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक बार फिर टिकट वितरण को लेकर चर्चा में आ गई है. एक हालिया मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में पार्टी के कुछ पदाधिकारियों पर चुनावी टिकट के बदले कथित तौर पर धनराशि की मांग करने के आरोप लगाए गए हैं, जिसने राज्य के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

स्टिंग ऑपरेशन के मुख्य दावे

स्टिंग रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के इच्छुक उम्मीदवारों से भारी-भरकम आर्थिक क्षमता दिखाने या योगदान देने की अपेक्षा की जाती है. इसके साथ ही, रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कराने के एवज में अलग से राशि मांगी जाती है. इस मामले में बसपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम भी सामने आए हैं.

मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में बीएसपी के सीनियर पदाधिकारियों को कथित तौर पर पार्टी टिकट पाने के लिए जरूरी पेमेंट पर चर्चा करते हुए रिकॉर्ड किया गया. जांच में दावा किया गया कि विधानसभा चुनाव के नॉमिनेशन के लिए उम्मीदवारों से 3.35 करोड़ रुपये से 3.5 करोड़ रुपये के बीच पेमेंट करने की उम्मीद थी और बीएसपी चीफ मायावती के साथ मीटिंग अरेंज करने के लिए भी 5 लाख रुपये का पेमेंट शामिल था.

बसपा का रुख: आरोपों को सिरे से नकारा

बहुजन समाज पार्टी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. पार्टी प्रमुख मायावती ने इसे चुनाव से ठीक पहले बसपा की छवि को धूमिल करने और संगठन को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है.

मायावती ने स्पष्ट किया कि:

  • पारदर्शी फंडिंग: बसपा का संचालन बड़े कॉरपोरेट घरानों या उद्योगपतियों के पैसे से नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के स्वैच्छिक योगदान से होता है.
  • वैध सहयोग: पार्टी को मिलने वाला आर्थिक सहयोग पूरी तरह वैध है, जिसका उपयोग संगठन की मजबूती और चुनावी गतिविधियों के संचालन में किया जाता है.
  • उम्मीदवारों के चयन के दौरान नेताओं की ओर से संभावित प्रत्याशियों की सामाजिक स्थिति, सांगठनिक प्रतिबद्धता और चुनाव लड़ने की आर्थिक-राजनीतिक क्षमता का आकलन किया जाता है. मायावती के अनुसार, इसी सामान्य और व्यावहारिक बातचीत को संदर्भ से काटकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.

चुनावी तैयारियों के बीच बढ़ा राजनीतिक तापमान

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बसपा आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने और अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को फिर से संगठित करने के प्रयास में जुटी हुई है. पिछले कुछ चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, जिसके कारण इस बार की चुनावी रणनीति पार्टी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा की केंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया और टिकट वितरण का अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व के पास होने के कारण, हर चुनाव से पहले इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं.

इस ताजा विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक दलों की फंडिंग व्यवस्था और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के मुद्दे को गरमा दिया है. जहां एक ओर आलोचक टिकट वितरण में धन के प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं बसपा इसे कार्यकर्ताओं के बल पर चलने वाले आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश बता रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति और दलों की वित्तीय पारदर्शिता की बहस को और तेज कर सकता है.

रुपये लेने के लिए पहले से बदनाम है बीएसपी

बता दें कि बीएसपी एक ऐसी पार्टी है जो अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से रुपये और अन्य प्रकार की दौलत लेने के लिए जानी जाती रही है. बीएसपी सत्ता में रहे या ना रहे इस पार्टी पर आरोप लगते रहे हैं कि यह बिना रुपये या अन्य तरह के उपहार लिए बगैर लोकसभा, विधानसभा, राज्य सभा, विधान परिषद या कई बार पार्षदी तक के टिकट नहीं देती है. बीएसपी में चलन रहा है कि मायावती के जन्मदिन के मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से मिलने वाले उपहार का बढ़ा चढ़ाकर जनता के सामने प्रदर्शित करती रही है. इसी वजह से मायावती के ऊपर आय से अधिक संपत्ति के मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं. हालांकि दान में तमाम दौलत मिलने की बात कही जाने चलते ये मुकदमे कोर्ट में बेनतीजा रहे हैं.

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Abhishek Kumar

अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एड‍िटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें



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