मुंह से लार, पैरों में घाव… गांवों में चुपके से पैर पसार रही यह पशु बीमारी
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Shahjahanpur News: बरसात में पशुओं में ‘खुरपका-मुंहपका’ (FMD) वायरस का खतरा बढ़ जाता है. इसमें पशु को तेज बुखार आता है, मुंह और खुरों में दर्दनाक छाले हो जाते हैं और लार टपकती है. इससे बचाव के लिए मानसून से पहले FMD का टीकाकरण जरूर करवाएं.
शाहजहांपुर: बरसात का मौसम आते ही पशुपालकों की चिंताएं बढ़ जाती हैं. इस मौसम में उमस और गंदगी के कारण पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से पनपता है, जिनमें ‘खुरपका-मुंहपका’ (FMD) सबसे घातक है. यह एक अत्यंत संक्रामक विषाणु जनित रोग है, जो दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है.
समय पर ध्यान न देने से यह बीमारी महामारी का रूप ले लेती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान पशुओं की विशेष देखरेख और उनके सही प्रबंधन को लेकर अलर्ट जारी किया है.
नियमित टीकाकरण ही बचाव का उपाय
प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि खुरपका-मुंहपका (FMD) एक तीव्र संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है. इस मौसम में हवा और दूषित चारे-पानी के जरिए यह वायरस तेजी से फैलता है. इससे बचाव का एकमात्र और सबसे प्रभावी उपाय नियमित टीकाकरण है. अगर किसी पशु में इसके लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए. पशुपालक घरेलू उपचार के भरोसे बैठने के बजाय तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह पर ही एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाएं दें.
रोग के लक्षण और प्रभाव
इस बीमारी की चपेट में आते ही पशु को तेज बुखार हो जाता है और वह सुस्त पड़ जाता है. पशु के मुंह, मसूड़ों, जीभ और खुरों के बीच में छोटे-छोटे छाले या दाने निकल आते हैं, जो बाद में फूटकर गहरे घाव का रूप ले लेते हैं. मुंह में घाव होने के कारण पशु के मुंह से लगातार झागदार लार टपकती रहती है और उसे चारा चबाने में अत्यधिक दर्द होता है. पैरों के घावों के कारण पशु लंगड़ाकर चलने लगता है और दर्द के मारे कई बार खड़ा होने में भी असमर्थ हो जाता है.
पशुओं का बचाव और टीकाकरण
खुरपका-मुंहपका से पशुओं को सुरक्षित रखने का सबसे अचूक हथियार टीकाकरण (Vaccination) है. पशुपालकों को मानसून शुरू होने से पहले ही सरकार की ओर से चलाए जाने वाले राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अपने सभी पशुओं को FMD का टीका जरूर लगवा लेना चाहिए. आमतौर पर यह वैक्सीन साल में दो बार लगाई जाती है. अगर पशुओं को समय पर टीका लग जाए, तो उनके शरीर में इस वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और बीमारी का खतरा न के बराबर हो जाता है.
पशुशाला की स्वच्छता और प्रबंधन
बरसात के दिनों में डेयरी फार्म की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. पशुओं के बांधने के स्थान पर कीचड़ या पानी जमा न होने दें, क्योंकि नमी में वायरस तेजी से पनपते हैं. फर्श को सूखा और साफ रखें और समय-समय पर चूने या फिनाइल का छिड़काव करें. बीमार पशु के दाने-पानी के बर्तन बिल्कुल अलग रखें. अगर किसी पशु के खुर में घाव हो गया हो, तो उसे लाल दवा यानी पोटैशियम परमैंगनेट के पानी से धोकर साफ करें, ताकि मक्खियां न बैठें.
पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां
इस मौसम में पशुओं को कभी भी दूषित या सड़ चुका चारा न खिलाएं और उन्हें साफ व ताजा पानी ही पिलाएं. बाहर से आने वाले नए पशुओं को सीधे अपने झुंड में शामिल न करें, बल्कि कुछ दिन अलग रखकर उनकी जांच करें. अगर क्षेत्र में बीमारी फैल रही हो, तो अपने पशुओं को बाहर चराने भेजने के बजाय घर पर ही सूखा और हरा चारा खिलाएं. पशु के बीमार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी देसी टोटका न अपनाएं, क्योंकि देरी करने से पशु की जान को खतरा हो सकता है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें