मुरादाबाद के निजी विश्विद्यालय ने की खोज, अब चावल-गेंहू की भूसी से बनेगा प्राकृतिक फ्लेवर
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मुरादाबाद के एक निजी विश्वविद्यालय ने फसल अवशेषों से कम लागत में वैनिलिन बनाने की नई तकनीक विकसित की है, जिसे 20 मार्च 2026 को पेटेंट मिल चुका है. इस तकनीक के जरिए गेहूं-धान के डंठल और गन्ने की खोई से वनीला फ्लेवर तैयार किया जा सकेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और कृषि कचरे का उपयोग बढ़ेगा.
मुरादाबाद. एक निजी विश्वविद्यालय ने कम लागत में वैनिलिन बनाने की नई तकनीक विकसित की है. इस तकनीक से गेहूं-धान के डंठल और गन्ने की खोई जैसे फसल अवशेषों से वैनिलिन तैयार किया जा सकेगा. इस शोध को 20 मार्च 2026 को पेटेंट भी मिल चुका है. वैनिलिन वही प्राकृतिक यौगिक है जो वनीला को उसकी खास खुशबू और स्वाद देता है. इसका इस्तेमाल आइसक्रीम, चॉकलेट, मिठाई, बेकरी उत्पाद, कोल्ड ड्रिंक, परफ्यूम और दवाओं में बड़े पैमाने पर होता है. अभी तक भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर वैनिलिन आयात करता है.
निजी यूनिवर्सिटी से किया शोध
निजी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. स्वपन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हमारे यहां एमएससी, बीएसससी,बायोटेक्नोलॉजी में और कई क्षेत्रों में अलग-अलग कोर्स चल रहे है. इसी कड़ी में हमारे यहां नया प्रोजेक्ट चल रहा है, इसमे खासकर कृषि से जो अवशेष मिलते है. जिसमें गेहूं की या चावल की जो भूसी होती है या गन्ने से निकलने वाला वेस्टेड होता है. उसपर हम लोग रिसर्च कर रहें है. हमारा मेंन उद्देश्य यही है कि किस तरह से कृषि के अवशेषों से और अधिक गुणवत्ता के प्रोडक्ट बना सके. जिसमें खासकर वनीला जो फ्लेवरिंग एजेंट के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उसपर काम कर रहे हैं. चावल और गेहूं की भूसी जो खासकर कृषि से निकलने वाला अवशेष है हमारी बायोटेक्नोलॉजी का एक ब्रांच है. उसमें हम लोग इन अवशेषों का इस्तेमाल करके माइक्रो के थ्रू इससे निकलने वाला जो पदार्थ है. उसको यूज करके बहुत सारे जो वैल्युएबल प्रोडक्ट बनाते हैं.
इससे बना सकते हैं कई चीज
इससे कई चीजें बनाई जा सकती है जिसमें बायोफ्यूल भी हो सकता है, बहुत सारे प्रोटीन भी हो सकते हैं. बहुत सारे एंजाइम बनाए जाते हैं, इसके साथ ही इसकी बहुत अच्छी गुणवत्ता होती है. अभी वनीला पर शोध हो गया है, वनीला खासकर आइसक्रीम में भी प्रयोग किया जाता है. इसके साथ ही जो मार्केट में सिरप मिलती है, उसमें भी फ्लेवर होता है जिसमें ज्यादातर वनीला का प्रयोग किया जाता है. इसके अलावा अन्य कई चीजों में वनीला का उपयोग किया जाता है. वर्तमान में नई तकनीक विकसित की गई है, इस तकनीक में पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें