मुरादाबाद नहीं…अब यूपी का यह जिला पीतल के नगरी के रूप में हुआ फेमस, विदेशों तक हो रही बंपर डिमांड

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मुरादाबाद नहीं…अब यूपी का यह जिला पीतल के नगरी के रूप में हुआ फेमस, विदेशों तक हो रही बंपर डिमांड


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Aligarh News: अलीगढ़, जो पहले ताला नगरी के नाम से प्रसिद्ध था, अब पीतल नगरी के रूप में भी पहचान बना रहा है. यहां के कारीगर उच्च गुणवत्ता वाली पीतल की मूर्तियां बनाते हैं.

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अलीगढ़ ताला नगरी से पीतल नगरी की ओर

हाइलाइट्स

  • अलीगढ़ का पीतल उद्योग तेजी से उभर रहा है.
  • पीतल की मूर्तियों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ रही है.
  • अलीगढ़ की अर्थव्यवस्था में पीतल उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान.

वसीम अहमद /अलीगढ़. उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ जनपद लंबे समय से अपनी बेहतरीन ताला निर्माण कला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है. इसे  ताला नगरी के नाम से जाना जाता था, क्योंकि यहां के मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाले ताले न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए जाते थे. लेकिन समय के साथ अलीगढ़ ने अपने औद्योगिक और कारीगरी कौशल को नए क्षेत्रों में भी फैलाया है.  खासतौर पर यहां का पीतल उद्योग तेजी से उभर कर सामने आया है, जिससे अलीगढ़ अब  पीतल नगरी के रूप में भी पहचान बना रहा है.

अलीगढ़ में पारंपरिक रूप से धातु कारीगरी की मजबूत जड़ें रही हैं और यही कारण है कि ताले बनाने की कला के साथ-साथ यहां पीतल की मूर्तियों और सजावटी वस्तुओं का निर्माण भी उच्च स्तर पर किया जाने लगा. शहर के कुशल कारीगर बारीक और नक्काशीदार मूर्तियां बनाते हैं, जो न केवल भारतीय बाजारों में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी संख्या में निर्यात की जाती हैं. मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सजावटी उद्देश्यों के लिए पीतल की मूर्तियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह उद्योग अलीगढ़ की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है.

जानकारी देते हुए पीतल कारोबारी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि आज, अलीगढ़ का पीतल उद्योग केवल मूर्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ धार्मिक मूर्तियां, सजावटी वस्तुएं, पीतल के हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, घरेलू सजावट की वस्तुयें और धातु की अन्य कलाकृतियां भी तैयार की जाती हैं. इस उद्योग के विस्तार का सबसे बड़ा कारण यहां के कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्पकला और उत्पादों की उच्च गुणवत्ता है. वैश्विक स्तर पर इन उत्पादों की मांग बढ़ने से अलीगढ़ के हजारों लोगों को रोजगार भी मिला है, जिससे यह क्षेत्र आर्थिक रूप से और मजबूत हो रहा है.

उन्होंने बताया कि अलीगढ़ का यह बदलता स्वरूप न केवल इसकी औद्योगिक प्रगति को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस प्रकार परंपरागत कारीगरी आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल सकती है. पीतल की मूर्तियों और अन्य उत्पादों की बढ़ती मांग ने अलीगढ़ को वैश्विक नक्शे पर एक नई पहचान दिलाई है, जिससे यह शहर अब ताले के साथ-साथ अपनी पीतल कला के लिए भी प्रसिद्ध हो गया है. यहां लड्डू गोपाल से लेकर रामलाल और राधा कृष्ण, लक्ष्मी जी की मूर्तियां बड़े पैमाने पर बनाई जा रही है जिनकी डिमांड देश के अलावा विदेशों में भी हो रही है.

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