मोहम्मद गोरी के सेनापति शमसुद्दीन की मजार पर चलेगा बुलडोजर, कोर्ट का आया आदेश

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मोहम्मद गोरी के सेनापति शमसुद्दीन की मजार पर चलेगा बुलडोजर, कोर्ट का आया आदेश


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सैकड़ों साल पुरानी शमसुद्दीन की अवैध मजार इटावा के फिशर वन में स्थापित है. अवैध मजार को ध्वस्त करने के आदेश के बाद प्रशासनिक टीम के सहयोग से मजार पर बुलडोजर एक्शन होगा.

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मोहम्मद गौरी के सेनापति की मजार पर चलेगा बुलडोजर.

इटावाः उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में मुगल आक्रांता मोहम्मद गोरी के सेनापति के शमसुद्दीन की अवैध मजार को गिराने का आदेश दे दिया गया है. अवैध मजार पर किसी भी समय बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई हो सकती है. इटावा के जिला वन अधिकारी विकास नायक की अदालत ने यह आदेश दिया है. वन अधिनियम 1927 की धारा 61 बी के तहत अवैध मजार को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया. मुस्लिम पक्ष मजार से जुड़ा हुआ कोई भी जमीनी दस्तावेज पेश नहीं कर सका है, जिसके बाद मजार को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है.

जनवरी से मुस्लिम पक्ष ने बंद कर दी थी अकीदत
सैकड़ों साल पुरानी शमसुद्दीन की अवैध मजार इटावा के फिशर वन में स्थापित है. अवैध मजार को ध्वस्त करने के आदेश के बाद प्रशासनिक टीम के सहयोग से मजार पर बुलडोजर एक्शन होगा. जनवरी माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऑफिस से आई शिकायत के बाद इस अवैध मजार की बेदखली पर प्रक्रिया शुरू की गई थी. 23 जनवरी की बाद से मुस्लिम पक्ष मजार पर अकीदत करने नहीं पहुंच रहा है.

कब बनी थी शमसुद्दीन की मजार
फिशर वन में यह मजार कब स्थापित की गई है, इस बारे में कोई सही और सटीक जानकारी ना तो आम लोगों को है और ना ही वन विभाग के किसी भी अधिकारी के पास इस बारे में कोई जानकारी है. हालांकि ऐतिहासिक दस्तावेज बताते है कि 1194 में इटावा में इस्लामी आक्रांता मोहम्मद गोरी ओर कन्नौज के राजा जयचंद के सिपहसालार सुमेर सिंह के बीच हुए तीक्ष्ण युद्ध में गोरी का सेनापति शमसुद्दीन दर्जनों आक्रांताओं के साथ मारा गया था. कुछ को बाइस ख्वाजा में दफनाया गया, लेकिन शमसुद्दीन की मजार फिशर वन में कैसे बनी इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं है.

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Prashant RaiChief Sub Editor

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