यूपी के सरकारी वकीलों की सैलरी और भत्ते में बंपर बढ़ोतरी, देखें पूरी लिस्ट
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UP Lawyers Salary Hike: यूपी की योगी कैबिनेट बैठक में सरकारी वकीलों के मानदेय और भत्तों में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी मिल गई है. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC) का मासिक मानदेय बढ़ाकर ₹14,000 और बहस फीस ₹2,500 कर दी गई है. वहीं, महाधिवक्ता को अब ₹1,25,000 प्रति माह और ₹60,000 प्रति कार्य दिवस बहस फीस मिलेगी. कैबिनेट ने विधि अधिकारियों के साथ किसानों और परिवहन से जुड़े 24 अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है.
योगी कैबिनेट का फैसला: यूपी में सरकारी वकीलों का बढ़ा मानदेय
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के न्यायिक ढांचे को मजबूत करने और सरकारी वकीलों को बड़ी राहत देने के लिए अपने पिटारे खोल दिए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में राज्य के विधि अधिकारियों (सरकारी वकीलों) के मानदेय और मासिक भत्तों में भारी वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेस वार्ता कर इन महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी. सरकार के इस फैसले से महाधिवक्ता से लेकर जिला स्तर के सरकारी वकीलों की जेब में अब पहले से कहीं ज्यादा पैसे आएंगे.
कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों पर लगी मुहर
इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में अलग-अलग विभागों से जुड़े कुल 25 प्रस्ताव पेश किए गए थे, जिनमें से 24 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई. केवल परिवहन विभाग से जुड़ा एक प्रस्ताव इस बैठक में पारित नहीं हो सका. मंजूर किए गए प्रस्तावों में किसानों, शहरी परिवहन व्यवस्था, जेल प्रशासन और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े कई बेहद अहम फैसले शामिल हैं, जो सीधे तौर पर जनता और व्यवस्था को प्रभावित करेंगे.
जिला स्तर के वकीलों की फीस और रिटेनरशिप में बड़ा उछाल
योगी कैबिनेट ने जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में सरकार का पक्ष रखने वाले वकीलों के रेट रिवाइज्ड (संशोधित) कर दिए हैं. नए संशोधनों के तहत जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC) का मासिक मानदेय (रिटेनर फीस) अब 9,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 14,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है. इसके साथ ही, अदालत में प्रति कार्य दिवस बहस करने की फीस को भी 1,650 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है.
इसी तरह, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) की रिटेनरशिप फीस को बढ़ाकर 11,000 रुपये (पहले यह 7,900 रुपये थी) और बहस फीस को 2,300 रुपये प्रति कार्य दिवस कर दिया गया है. सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता को अब 10,000 रुपये प्रति माह और 2,300 रुपये प्रति कार्य दिवस बहस फीस मिलेगी. उप जिला शासकीय अधिवक्ता के लिए 9,000 रुपये प्रति माह और 2,000 रुपये प्रति कार्य दिवस बहस फीस तय की गई है. इसके अलावा नामिका वकील, विशेष अधिवक्ता और न्याय वित्त दीवानी फौजदारी के लिए ₹2300 की फीस निर्धारित की गई है.
महाधिवक्ता और शीर्ष विधि अधिकारियों की नई सैलरी और फीस
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, राज्य के शीर्ष विधि अधिकारियों के मानदेय और भत्तों में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी की गई है, जो इस प्रकार है:
- महाधिवक्ता: ₹1,25,000 प्रति माह मानदेय और ₹60,000 प्रति कार्य दिवस बहस फीस.
- अपर महाधिवक्ता: ₹50,000 प्रति माह मानदेय और ₹40,000 प्रति कार्य दिवस बहस फीस.
- अपर महाधिवक्ता: ₹50,000 प्रति माह मानदेय और ₹50,000 प्रति कार्य दिवस बहस फीस.
- मुख्य स्थायी अधिवक्ता: ₹35,000 प्रति माह मानदेय और ₹12,000 प्रति कार्य दिवस बहस फीस.
- अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, अपर शासकीय अधिवक्ता व अपर लोक अभियोजक: ₹20,000 प्रति माह मानदेय और ₹8,000 प्रति कार्य दिवस बहस फीस.
योगी सरकार के इस बड़े कदम से प्रदेश के हजारों विधि अधिकारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा, जिससे सरकारी स्तर पर मुकदमों की पैरवी और अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें