रामपुरी चाकू ही नहीं, ‘शाही आम’ भी थी रामपुर की पहचान, पढ़ें कहानी

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रामपुरी चाकू ही नहीं, ‘शाही आम’ भी थी रामपुर की पहचान, पढ़ें कहानी


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Rampur news: मशहूर चाकू और नवाबी तहजीब के लिए विख्यात उत्तर प्रदेश का रामपुर जिला कभी अपने रसीले और खुशबूदार ‘शाही आमों’ के लिए भी जाना जाता था. नवाबी दौर में मेहमानों का स्वागत इत्र के साथ इन खास आमों से होता था. रियासत के विलय के बाद आखिरी शासक नवाब रजा अली खान ने यहां के नायाब आम पंडित नेहरू और सरदार पटेल जैसे बड़े नेताओं को भी भेंट किए थे. आज भी रामपुर के सैकड़ों साल पुराने बाग इस शाही विरासत को संजोए हुए हैं.

Rampur news: उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक जिला रामपुर सिर्फ अपने नवाबों, मशहूर रामपुरी चाकू और खास तहजीब के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां के बागों में पकने वाला रसीला आम भी कभी ‘शाही मेहमाननवाजी’ की सबसे बड़ी पहचान हुआ करता था. नवाबी दौर में जब कोई खास मेहमान रामपुर की सरजमीं पर कदम रखता था, तो उसका स्वागत केवल इत्र और अदब से नहीं, बल्कि इस खास सीजन में आम की दावतों से किया जाता था. गर्मियों के मौसम में होने वाली हर शाही महफिल की शान यही रामपुरी आम हुआ करते थे, जिनकी खुशबू और स्वाद के दीवाने देश-विदेश तक फैले थे.

रुतबे और सम्मान की निशानी था रामपुरी आम
इतिहासकार काशिफ खान के मुताबिक, उस दौर में आम केवल एक साधारण फल नहीं था, बल्कि इसे रुतबे और सम्मान की बेहद खास निशानी माना जाता था. नवाबों के खास बागों में तैयार होने वाले रसीले और खुशबूदार आम दूर-दूर तक चर्चा का विषय बने रहते थे. यही वजह थी कि रामपुर का आम राजा-महाराजाओं से लेकर देश के बड़े-बड़े राजनेताओं तक की पहली पसंद बन गया था.

सरदार पटेल और नेहरू जी को भेजे जाते थे खास तोहफे
नवाबी दौर में जब भी किसी वीआईपी या खास मेहमान के आने की खबर रियासत को मिलती थी, तो बागों से चुन-चुनकर सबसे बेहतरीन और नायाब आम मंगवाए जाते थे. कहा जाता है कि रामपुर रियासत के विलय के बाद यहां के आखिरी शासक नवाब रजा अली खान ने यहां के आम देश के बड़े नेताओं को भी भेंट किए थे. उस दौर में किसी को आम देना सिर्फ एक तोहफा नहीं, बल्कि शाही अपनापन और इज्जत दिखाने का एक पारंपरिक तरीका माना जाता था.

नवाबी दौर में राजा-महाराजाओं, विभिन्न रियासतों और उस समय सत्ता में रहे राजनेताओं के बीच रामपुरी आम बेहद चर्चा में रहा करता था. रामपुर रियासत के विलय के बाद आखिरी शासक नवाब रजा अली खान ने इस बाग के आम तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल, प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू व अन्य बड़े नेताओं को भी भेंट किए.

सैकड़ों साल पुरानी विरासत हैं रामपुर के ये बाग
रामपुर में आज भी कई ऐसे ऐतिहासिक बाग मौजूद हैं, जिन्हें नवाबी दौर में खास तौर पर तैयार कराया गया था. इन बागों में लगे आम के पेड़ अब सैकड़ों साल पुरानी अनमोल विरासत बन चुके हैं. सबसे खास बात यह है कि यहां आज भी आम की कई ऐसी नायाब वैरायटी देखने को मिलती हैं, जो कहीं और आसानी से नहीं मिलतीं. हर सीजन में अलग-अलग किस्म के आम आज भी बाजार में आकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

लक्खी बाग से आज भी दिल्ली जाता है शाही स्वाद
इन्हीं ऐतिहासिक बागों में से रामपुर का ‘लक्खी बाग’, ‘कोठी खास बाग’ और ‘कोठी बेनजीर बाग’ सिर्फ पेड़ों की भारी संख्या के लिए ही खास नहीं हैं, बल्कि यहां मिलने वाली आम की नायाब किस्में भी इनकी असली पहचान थीं. इस शाही परंपरा का असर आज भी देखा जा सकता है, क्योंकि आज भी नवाब खानदान की तरफ से दिल्ली में रहने वाले अपने करीबियों और रिश्तेदारों के लिए यहां के चुनिंदा आम खास तौर पर भेजे जाते हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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