रुकमणि की इच्छा पर श्री कृष्ण ने कनक भवन का कराया था कायाकल्प, जाने
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अयोध्या के रामकोट स्थित कनक भवन को माता सीता का निजी महल माना जाता है, मान्यता है त्रेता में बना और द्वापर में श्रीकृष्ण ने पुनर्निर्माण कराया. अब यहां भक्तों की भीड़ बढ़ी है. अयोध्या के प्रसिद्ध विद्वान पवन दास शास्त्री के बताते हैं कि कनक भवन माता सीता को मुंह दिखाई की रस्म में माता कैकई द्वारा भेंट किया गया था. विवाह के बाद जब माता सीता पहली बार अयोध्या पहुंचीं, तब महारानी कैकई ने उन्हें यह दिव्य भवन उपहार स्वरूप दिया. इसलिए इसे माता जानकी का निजी महल और निवास स्थान भी माना जाता है.
अयोध्या: अयोध्या की पावन धरती पर स्थित कनक भवन केवल एक मंदिर नहीं बल्कि भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रेम, आस्था और दिव्य स्मृतियों का जीवंत प्रतीक माना जाता है. रामनगरी के रामकोट क्षेत्र में स्थित यह मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि त्रेता युग में यह भवन स्वर्ण यानी सोने का बना हुआ था. इसी कारण इसका नाम कनक भवन पड़ा.
सीता जी का था निजी भवन
अयोध्या के प्रसिद्ध विद्वान पवन दास शास्त्री के बताते हैं कि कनक भवन माता सीता को मुंह दिखाई की रस्म में माता कैकई द्वारा भेंट किया गया था. विवाह के बाद जब माता सीता पहली बार अयोध्या पहुंचीं, तब महारानी कैकई ने उन्हें यह दिव्य भवन उपहार स्वरूप दिया. इसलिए इसे माता जानकी का निजी महल और निवास स्थान भी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान श्रीराम और माता सीता ने अपने वैवाहिक जीवन का समय बिताया था. कनक भवन का इतिहास केवल त्रेता युग तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसका संबंध द्वापर युग से भी जोड़ा जाता है.
श्री कृष्ण ने कराया था कायाकल्प
मान्यता है कि जब द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण अयोध्या आए थे तब उनकी पत्नी रुक्मिणी ने कनक भवन की महिमा के बारे में सुना. कहा जाता है कि रुक्मिणी जी की इच्छा पर भगवान श्रीकृष्ण ने इस भवन का पुनर्निर्माण और कायाकल्प कराया था. इसी कारण कनक भवन का महत्व त्रेता और द्वापर दोनों युगों से जुड़ा हुआ माना जाता है.हालांकि इस कथा का उल्लेख प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से नहीं मिलता, लेकिन अयोध्या की लोक परंपराओं और संत समाज में यह मान्यता आज भी प्रचलित है.
कनक भवन में भगवान श्रीराम और माता जानकी की मनमोहक प्रतिमाएं विराजमान हैं. मंदिर की सुंदरता, दिव्यता और भक्ति का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराता है.राम मंदिर निर्माण के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है और प्रतिदिन लाखों भक्त कनक भवन पहुंचकर दर्शन-पूजन कर रहे हैं. अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कनक भवन आज भी राम-सीता के प्रेम और सनातन आस्था का अद्भुत प्रतीक बना हुआ है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें