लड़की का कपड़ा उतारना रेप है या नहीं…? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर दिया साफ
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला के कपड़े उतारना लेकिन उसके विरोध के चलते संबंध ना बना पाना भी रेप का प्रयास ही माना जाएगा.
रेप के प्रयास के मामले पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी.
हाइलाइट्स
- रेप के प्रयास के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी.
- हाईकोर्ट ने कहा कि कपड़े उतारना रेप का प्रयास है.
- हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपित की याचिका.
बता दें कि इससे पहले मार्च महीने में नाबालिग बच्ची के साथ रेप की कोशिश के मामले में सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक टिप्पणी की थी, जिसमें कहा गया था कि किसी पीड़िता के स्तनों को छूना या कपड़े उतारने की कोशिश, दुष्कर्म का अपराध नहीं माना जा सकता है. इसे यौन उत्पीड़न जरूर कहा जाएगा.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक एकल न्यायाधीश ने कहा कि पीड़ित पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि आरोपी ने पीड़िता का ना केवल शादी करने और यौन संबंध बनाने के इरादे से अपहरण किया था, बल्कि रेप के प्रयास के बराबर यौन उत्पीड़न भी किया था. बता दें कि अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि धारा 164 सीआरपीसी के तहत पीड़िता के बयानों के अनुसार, उसे आरोपी द्वारा मारुति वैन में जबरन ले जाया गया था, लगभग 20 दिनों तक एक रिश्तेदार के घर में कैद रखा गया था और उस अवधि के दौरान, आरोपी ने उसके कपड़े उतार दिए और उसकी इच्छा के विरुद्ध ‘बुरा काम’ करने की कोशिश की, लेकिन उसके विरोध के कारण वह संबंध बनाने में विफल रहा.
सुनवाई के दौरान कई फैसलों का दिया गया हवाला
अपने विश्लेषण में कोर्ट ने पंढरीनाथ बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में 2009 के फैसले सहित सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों पर भरोसा किया, जिसमें यह माना गया था कि यदि आरोपी ने पीड़िता के कपड़े उतारे हैं, तो यह बलात्कार के प्रयास का मामला होगा. पीठ ने इसराइल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में उच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि एक बार तैयारी पूरी हो जाने के बाद और आरोपी बलात्कार करने के इरादे से कोई कार्य शुरू कर देता है, तो प्रयास का अपराध बनता है,
पीड़िता ने बताई थी आपबीती
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि पीड़िता ने न केवल मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत अपने बयान में, बल्कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष साक्ष्य में भी कहा था कि अपीलकर्ता ने उसके कपड़े उतारे थे. हालांकि, उसके विरोध करने पर, वह उसके साथ संभोग नहीं कर सका. साथ ही न्यायालय ने दुश्मनी के आधार पर आवेदक को फंसाने की दलील को भी खारिज कर दिया, क्योंकि कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता द्वारा इसे साबित नहीं किया जा सका. इस प्रकार, धारा 363, 366, 376/511 और 354 आईपीसी के तहत आरोपी को दोषी ठहराने वाले विवादित निर्णय और आदेश को बरकरार रखा गया, और उसकी अपील खारिज कर दी गई.

Prashant Rai is a seasoned journalist with over seven years of extensive experience in the media industry. Having honed his skills at some of the most respected news outlets, including ETV Bharat, Amar Ujala, a…और पढ़ें
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