‘सर.. बहुत ठंड लग रही, छुट्टी दे दीजिए’, बच्चों की फरियाद देख पिघले DM साहब, मंच से ही कर दिया ऐलान
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Kanpur News: कानपुर में पड़ रही भीषण ठंड और बच्चों के आग्रह को देखते हुए जिलाधिकारी ने छुट्टी का ऐलान कर दिया है. जिलाधिकारी की घोषणा के अनुसार, नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों में दो दिन का अवकाश रहेगा. जैसे ही यह घोषणा हुई, बच्चों के चेहरे खिल उठे.
कानपुर: जिले और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों कड़ाके की ठंड और बिगड़े मौसम ने आम जनजीवन को काफी प्रभावित किया है. खासतौर पर छोटे बच्चों को सुबह स्कूल जाने में काफी परेशानी हो रही है. ठंड, कोहरा और सर्द हवाओं के बीच बच्चे लगातार छुट्टी की मांग कर रहे थे. इसी को देखते हुए जिलाधिकारी ने एक भावनात्मक और मानवीय फैसला लेते हुए बच्चों को बड़ी राहत दी.
जिलाधिकारी ने एक कार्यक्रम के दौरान बच्चों से सीधे संवाद किया. उन्होंने बच्चों से उनकी परेशानी के बारे में पूछा और जाना कि ठंड की वजह से उन्हें स्कूल आने-जाने में दिक्कत हो रही है. बच्चों ने भी बिना झिझक अपनी बात रखी और कहा कि सर्दी बहुत ज्यादा है. बच्चों की मासूम बातों और चेहरे पर दिख रही परेशानी को देखकर जिलाधिकारी ने तुरंत फैसला लिया और वहीं मंच से दो दिन की छुट्टी का ऐलान कर दिया.
बच्चों की मांग, डीएम का त्वरित फैसला
बीते कुछ दिनों से लगातार मौसम खराब चल रहा है. सुबह-सुबह घना कोहरा, तेज सर्द हवा और गिरते तापमान की वजह से बच्चों की तबीयत पर भी असर पड़ रहा था. कई बच्चों ने हिम्मत करके जिलाधिकारी को सीधे संदेश भेजे थे. इन संदेशों में बच्चों ने सरल शब्दों में लिखा था कि ‘डीएम अंकल, बहुत ठंड है, छुट्टी कर दीजिए’. जिलाधिकारी ने इन संदेशों को हल्के में नहीं लिया. उन्होंने बच्चों की परेशानी को गंभीरता से समझा और मौके पर ही बच्चों से बातचीत के बाद निर्णय ले लिया कि ठंड के दौर में बच्चों को राहत दी जानी चाहिए.
नर्सरी से 12वीं तक सभी स्कूल बंद
जिलाधिकारी की घोषणा के अनुसार, नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों में दो दिन का अवकाश रहेगा. जैसे ही यह घोषणा हुई, बच्चों के चेहरे खिल उठे. बच्चों ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की और जिलाधिकारी का जोरदार धन्यवाद किया. अचानक मिली इस छुट्टी ने बच्चों के बीच खुशी की लहर दौड़ा दी. कुछ बच्चे खुशी से उछलते नजर आए तो कुछ ने इसे अपने लिए एक यादगार पल बताया. बच्चों का कहना था कि पहली बार ऐसा हुआ है, जब किसी अधिकारी ने उनकी बात सुनकर तुरंत फैसला लिया.
मानवीय सोच की मिसाल बना फैसला
यह फैसला सिर्फ एक छुट्टी की घोषणा नहीं था, बल्कि यह बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का उदाहरण भी था. ठंड के मौसम में बच्चों की सेहत सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. ऐसे में जिलाधिकारी का यह कदम अभिभावकों के लिए भी राहत भरा साबित हुआ. अभिभावकों ने भी इस फैसले की सराहना की और कहा कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है. यह घटना बच्चों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाली बन गई, जब उन्हें खुद जिलाधिकारी से दो दिन की छुट्टी का तोहफा मिला.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.