सावधान! रत्न धारण करने के बाद भूलकर भी न करें यह गलती, जिदंगी में आ सकता है संकट, ज्योतिषी ने दी चेतावनी

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सावधान! रत्न धारण करने के बाद भूलकर भी न करें यह गलती, जिदंगी में आ सकता है संकट, ज्योतिषी ने दी चेतावनी


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Astro Tips: ज्योतिष शास्त्र में रत्न धारण से पहले कुंडली और ग्रह दशा देखना जरूरी है. गलत रत्न या गलत विधि से नकारात्मक असर पड़ सकता है. टूटे रत्न न पहनें, बार-बार न उतारें और किसी और का रत्न न धारण करें. पुखराज, मोती, माणिक के साथ संयम जरूरी है.

अयोध्या: ज्योतिष शास्त्र में रत्न को ग्रह की ऊर्जा को शरीर में संचारित करने वाला शक्तिशाली माध्यम माना जाता है. अक्सर आपने देखा होगा लोग अपने हाथों में अलग-अलग प्रकार के रत्न धारण करते हैं. रत्न ग्रहों की कमजोरी को मजबूत करते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं. लेकिन धारण करने की विधि जितनी महत्वपूर्ण है उससे कहीं महत्वपूर्ण धारण करने के बाद की सावधानियां हैं. अगर आप इसमें से कोई भी गलती धारण करते वक्त करते हैं. तो आपको नकारात्मक प्रभाव देखने पड़ते हैं .आर्थिक नुकसान होता है मानसिक तनाव और ग्रह दोष बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में रत्न धारण करने से पहले कुछ गलतियों से बचना चाहिए. तो चलिए अयोध्या के ज्योतिषी से विस्तार से जानते हैं कि कैसे रत्न धारण करना चाहिए और किन सावधानी को बरतनी  चाहिए.

अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम बताते हैं कि मानव जीवन में लोग रत्न को धारण करते हैं. रत्न को धारण करने से पहले इस बात का विशेष ध्यान रहे कि  कुंडली में ग्रह दशा किसकी चल रही है. हमारे नक्षत्र का स्वामी कौन है. अगर नक्षत्र के स्वामी केतु हैं, मंगल हैं, बृहस्पति हैं तो इस नक्षत्र के अनुसार ही ज्योतिषी परामर्श के आधार पर ही रत्न को धारण करना चाहिए. सभी रत्न में पुखराज और नीलम रत्न बहुत ही प्रभावशाली माने जाते हैं. अगर आपने बिना किसी ज्योतिषी के परामर्श के आधार पर पुखराज रत्न धारण किया है और अगर आप संपत्ति वाहक हैं तो अचानक आप का व्यवसाय बंद हो जाएगा, कर्ज में डूब जाएंगे. ऐसी स्थिति में रत्न को धारण करने से पहले कुछ विशेष सावधानी को भी बरतनी चाहिए.

रत्न धारण करने के बाद सबसे पहले सावधानियां है कि समय-समय पर उस रत्न की जांच कराते रहें. कहीं कोई रत्न का कोई कोना टूटा तो नहीं है या चटका तो नहीं है तो उस रत्न को तुरंत ही उतार देनी चाहिए. इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में खंडित रत्न को नकारात्मक ऊर्जा का भंडार माना जाता है. ऐसा रत्न पहनने से ग्रह की शुभ ऊर्जा धीरे-धीरे खत्म होती है और अशुभ ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है.

कई बार आपने देखा होगा कि लोग सोते समय, स्नान करते समय व्यायाम करते समय अपने हाथों से अंगूठी में जड़ित रत्न को उतार देते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से ग्रह के साथ-साथ आपके ऊपर कई तरह की विपत्ति भी आ सकती है .

रत्न एक व्यक्तिगत ऊर्जा कवच की तरह काम करता है. ऐसी स्थिति में किसी दूसरे का रत्न कभी नहीं धारण करना चाहिए. अपना पहना हुआ रत्न भी किसी मित्र या रिश्तेदार को ट्रायल के लिए कभी नहीं देना चाहिए. ज्योतिषीय दृष्टि से यह हानिकारक माना जाता है. इससे एक दूसरे व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा आप तक पहुंच सकती है और आपके रत्न का प्रभाव भी दूषित हो सकता है.

विभिन्न रत्न के लिए अलग-अलग नियम भी बनाए गए हैं. विशेष रूप से अगर आप पुखराज, मोती या माणिक  रत्न धारण करते हैं तो धारण करने के बाद कभी भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. इससे दुष्प्रभाव भी देखने पड़ते हैं.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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