सुंदरकांड की इस चौपाई में छिपा है चमत्कार, रोजाना कर लें पाठ, फिर देखें कमाल
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Sundarkand Path: कलयुग में हनुमान जी को जागृत देवता माना जाता है. माना जाता है कि रोजाना सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं. ऐसे में सुंदरकांड की कुछ चौपाई का खास महत्व है. आइए जानते हैं.
दरअसल साधु संतों का ऐसा मानना है कि अगर आप सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं और सुंदरकांड के दोहे अथवा चौपाई के बारे में आपको नहीं पता है तो उसका पुण्य आपको नहीं प्राप्त होगा. ऐसी स्थिति में सुंदरकांड का पाठ करते समय उसका अर्थ भी पता होना चाहिए. तभी उसका पुण्य प्राप्त होगा. सुंदरकांड में एक चौपाई लिखी गई है ‘जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा, कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा, सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ, तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ’…सुंदरकांड के इस दोहे में हनुमान जी महाराज की अद्भुत शक्ति और उनकी बुद्धि-विवेक को दर्शाया गया है. इस दोहे के बारे में शशिकांत दास विस्तार से बताते हैं.
सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ, तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ….अर्थात सुरसा ने अपना मुंह 16 योजन तक फैला लिया. जिसके बाद तुरंत ही पवन पुत्र हनुमान भी 32 योजन के हो गए . सुंदरकांड का यह दोहा हनुमान जी और सुरसा के बीच संवाद का वर्णन कर रहा है.
शशिकांत दास बताते हैं कि व्यक्ति को प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करने से उसका अर्थ समझाने से कई गुना फल की प्राप्ति भी होती है. जीवन में डर से मुक्ति मिलती है. सभी संकट से निवारण मिलता है. हनुमान जी महाराज की विशेष कृपा बनी रहती है.
मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक से सक्रिय. वर्तमान में News18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की.फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, वेबदुनिया समेत कई जगहों पर रिपोर्टिंग और डेस्क मे…और पढ़ें
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