हर-हर महादेव के आगे शाहजहां का ताजमहल पड़ा फीका… वाराणसी में आई टूरिस्टों की ऐसी बाढ़, आगरा पीछे छूटा
ृृृयह बदलाव जितना बड़ा है, उतना ही चौंकाने वाला भी है. 2019 में वाराणसी का टूरिस्ट शेयर महज़ 3.8% था, वहीं आगरा तब 15.5% के साथ सबसे पहले पायदान पर था. साल 2016 से 2018 के बीच भी वाराणसी की औसत हिस्सेदारी सिर्फ 7.6% रही थी.
बीते कुछ वर्षों में वाराणसी में जिस तरह से हाई प्रोफाइल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का जाल बिछाया गया, उसका असर अब साफ दिख रहा है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसने न सिर्फ धार्मिक श्रद्धालुओं को आकर्षित किया बल्कि शहर के सौंदर्य और सुविधाओं में भी बड़ा इजाफा किया. हाल ही में 2 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी और आसपास के इलाकों में 2,200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया. इसने वाराणसी को देश के टॉप टूरिस्ट हब में बदल दिया है.
आगरा की चमक हुई थोड़ी फीकी
एक समय पर यूपी के पर्यटन का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाला आगरा, जहां ताजमहल की वजह से अंतरराष्ट्रीय टूरिस्टों का तांता लगा रहता था, अब वाराणसी से पीछे हो गया है. 2016 में जहां आगरा का टूरिस्ट शेयर 29.4% था.. वह 2023 में गिरकर 21.9% पर आ गया.
अयोध्या भी बना नया मैगनेट
राम मंदिर निर्माण के चलते अयोध्या में भी टूरिज्म ने तेजी से उड़ान भरी है. 2019 में जहां अयोध्या की हिस्सेदारी 5.6% थी, वहीं 2023 में ये बढ़कर 13.1% हो गई. यह साबित करता है कि धार्मिक टूरिज्म भारत में कितनी गहराई से जुड़ा हुआ है.
वहीं, अन्य शहरों की बात करें तो बरेली जो 2019 में निचले स्तर पर था, लेकिन 2023 में 7.7% हिस्सेदारी के साथ उभरा है. प्रयागराज साल 2019 में अर्धकुंभ की वजह से 53.6% तक उछला, लेकिन 2023 में गिरकर 11.2% पर लौट आया. लखनऊ, झांसी, मेरठ, गोरखपुर की स्थिति तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी रही.