हल्की बारिश और बलुई मिट्टी से तैयार मऊ के खरबूजे, इसकी मिठास के आगे शक्कर भी फेल

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हल्की बारिश और बलुई मिट्टी से तैयार मऊ के खरबूजे, इसकी मिठास के आगे शक्कर भी फेल


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मऊ जनपद का देसी खरबूजा अपनी अनोखी मिठास और स्वाद के लिए देश-विदेश तक मशहूर है. बलुई मिट्टी और नदी किनारे होने वाली खेती इसकी मिठास को और बढ़ा देती है. ऊपर से हरा और अंदर से पीला यह खरबूजा हल्का काला नमक लगाकर खाने पर और भी स्वादिष्ट लगता है. एक बार इसका स्वाद चखने वाले लोग दूसरे जगह के खरबूजे भूल जाते हैं.

मऊ जनपद में मिलने वाले खरबूज को यदि आप घर लाते हैं और उसके छिलके को निकाल कर यदि उस पर हल्का काला नमक लगाकर खाते हैं तो इसका स्वाद और बढ़ जाता है. यही वजह है कि लोग इसे काफी मन से खाते हैं, यदि आप एक बार मऊ में मिलने वाला खरबूज को खा लिए तो अन्य जगह का खरबूज खाना भूल जाएंगे, क्योंकि मऊ जनपद में देसी खरबूज की बुवाई की जाती है जिसका स्वाद काफी बेहतर होता है.

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यदि आप खरबूज खाने के शौकीन है तो एक बार मऊ जनपद में मिलने वाला देसी खरबूज को अवश्य खाए. ऊपर से तो यह हरा होता हैं, लेकिन अंदर से पीला होता है और काफी मीठा होता है. यदि एक बार इस खरबूज को खा लिए तो अन्य जगह का खरबूज खाना भूल जाएंगे, क्योंकि यह हल्के पानी में होता है. जिससे इसकी मिठास काफी बढ़ जाती है और इसकी मिठास के आगे शक्कर भी फेल है इसलिए इसे हर कोई पसंद कर रहा है.

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 गर्मी का सीजन चल रहा है ऐसे में लोग तरबूज और खरबूज खान काफी पसंद करते हैं लेकिन क्या आपको पता है. उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में मिलने वाला खरबूज की मांग विदेशों तक है, क्योंकि मऊ में एक अलग ही प्रकार का खरबूज पाया जाता है जिसकी मिठास इतनी है कि लोग इसे काफी पसंद करते हैं. यही वजह है कि इस खरबूज की मांग विदेश में भी है, लोग मऊ से इस खरबूज को विदेश भी लेकर जाते हैं.

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मऊ में खरबूज की खेती अधिक होती है, क्योंकि यहां बलुवारा मिट्टी अधिक है, और यह खरबूजा इसी मिट्टी में अधिक होता है. इस मिट्टी में इसकी उपज और पैदावार अधिक होती है और उनके फलों में मिठास अधिक आती है. इस वजह से इसकी खेती अधिक की जाती है, हालांकि यह खेती नदी के किनारे अधिक होती है. जिससे इन फलों में और मीठा आता है और बाजारों में लोग से काफी पसंद करते हैं. गर्मी के दिनों यह हर किसी के घर आसानी से मिल जाएगा क्योंकि लोग इसे खाना बहुत पसंद करते हैं.

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बलुई मिट्टी में होने वाला यह खरबूज खेतों से निकलने के बाद भी कई दिनों तक खराब नहीं होता है, इस वजह से लोग इसे आसानी से लेकर विदेश चले जाते हैं, क्योंकि मऊ जनपद में होने वाला खरबूज काफी मिठास होता है. यही वजह है कि लोग इसे काफी पसंद करते हैं, हालांकि मई महीने की शुरुआती में यह बाजारों में आ जाता है और मई महीने के आखिरी दिनों तक यह चलता रहता है. बाजारों में आपको कई प्रकार के खरबूज मिलेंगे, लेकिन मऊ का यदि एक बार खरबूज खा लिए तो अन्य जगह का खरबूज खाना भूल जाएंगे.

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मऊ में खरबूज दो प्रकार के पाए जाते हैं एक खरबूज हरे रंग का और एक खरबूज पीला रंग का होता है लेकिन यह देसी खरबूज होता है, इस वजह से इसकी मिठास अधिक होती है. इसमें सबसे अधिक लोग पीले खरबूज को पसंद करते हैं हालांकि शुरुआत में यह खरबूज भी हरे रंग का होता है लेकिन जब यह खरबूज पक जाता है तो हल्का पीला आकार का हो जाता है और इसकी मिठास इतनी अधिक होती है कि शक्कर भी इसके आगे फेल होता है.

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फरवरी महीने में इस खेती की शुरुआत की जाती है और अप्रैल महीने के लास्ट से खरबूज बाजारों में मिलने लगता है, और इस खरबूज की मांग इतनी है कि लोग इसे दिल्ली मुंबई कोलकाता चेन्नई जैसे शहरों में लेकर जाते ही हैं साथ में विदेश तक लोग से लेकर जाते हैं. क्योंकि इस खरबूज की खासियत ऐसी है कि जो एक बार इस मऊ में मिलने वाले खरबूज को खा लेगा वह अन्य जनपद में मिलने वाले तरबूज को नहीं खाएगा.

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यदि हल्की बारिश हो केवल और यह खरबूज हल्की बारिश ले ले तो इसकी मिठास और बढ़ जाती है. लेकिन अधिक बारिश होने के बाद यह बिल्कुल फीका हो जाता है जिसके बाद इसका स्वाद नहीं मिलता, लेकिन शुरुआती दौर में हल्की बारिश में ही यह खेतों से बाजारों में आकर मिलने लगता है. लोग इसे बड़े ही मन से लेकर खाते हैं. यह सिर्फ मऊ ही नहीं बल्कि यहां से विदेश जाने वाले लोग भी लेकर जाते हैं क्योंकि इस खरबूजे का स्वाद और कहीं नहीं मिलेगा.



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