50 KG यूरिया के साथ गेहूं के खेतों में डाल दें 250 ML ये जैविक उत्पाद! होगा रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन

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50 KG यूरिया के साथ गेहूं के खेतों में डाल दें 250 ML ये जैविक उत्पाद! होगा रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन


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Wheat Farming Tips : 50 किलो यूरिया के साथ 250 एमएल जैविक उत्पाद ‘ब्लूम विस्टा’ का प्रयोग करने से गेहूं की फसल को संतुलित पोषण मिलता है, जिससे जड़ों का विकास बेहतर होता है और कल्ले तेजी से निकलते हैं. यह संयोजन नाइट्रोजन के अवशोषण को बढ़ाता है, फसल को तनाव से बचाता है और दाने भराव मजबूत करता है.

शाहजहांपुर : जनवरी की ठंड और कोहरा गेहूं की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह समय गेहूं में ‘कल्ले’ निकलने की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है. अधिक कल्ले होने से अधिक बालियां निकलती हैं, जिससे किसानों को रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन मिलता है. इस समय किसान पहली सिंचाई और सही पोषक तत्वों का प्रबंधन करके गेहूं की फसल का कायाकल्प कर सकते हैं. सही समय पर नाइट्रोजन का प्रयोग और जैविक उत्पादों का मेल न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, बल्कि फसल को हरा-भरा और मजबूत भी बनाता है. अगर आप भी गेहूं की खेती कर रहे हैं, तो कल्ले बढ़ाने के इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर लाभ उठा सकते हैं.

डॉ. एन.पी. गुप्ता ने बताया कि गेहूं की फसल में 21 से 25 दिनों की अवस्था ‘क्राउन रूट इनीशिएशन’ कहलाती है. इस समय की गई पहली सिंचाई पौधों में कल्लों की संख्या निर्धारित करती है. इस समय किसान सिंचाई के बाद नमी का लाभ उठाते हुए नाइट्रोजन के साथ जैविक उत्पाद ‘ब्लूम विस्टा’ का छिड़काव करें. यह मिश्रण मिट्टी में सुप्त अवस्था में पड़े पोषक तत्वों को सक्रिय कर देता है, जिससे जड़ों का विकास तेजी से होता है और कल्ले अनगिनत निकलते हैं. शाम के समय छिड़काव करना सबसे प्रभावी है क्योंकि ओस और कम तापमान में पौधे पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से सोखते हैं.

रखें इन बातों का ध्यान
सिंचाई के 5-6 दिन बाद, जब खेत में पैर टिकने लगें, तब प्रति एकड़ 40 से 50 किलोग्राम यूरिया लें. इसमें 250 मिलीलीटर जैविक उत्पाद ‘ब्लूम विस्टा’ को अच्छी तरह मिला लें. इस मिश्रण का समान रूप से पूरे खेत में छिड़काव करें. बेहतर परिणाम के लिए यह कार्य शाम के समय करें. सिंचाई करते समय ध्यान रखें कि पानी खेत में खड़ा न रहे, हल्का पानी ही पर्याप्त है. अधिक पानी से जड़ें काली पड़ सकती हैं और कल्ले कम निकलते हैं. यदि जलभराव हो जाए, तो तुरंत निकासी की व्यवस्था करें. छिड़काव के समय हवा की दिशा का ध्यान रखें और यह सुनिश्चित करें कि मिश्रण पौधों की जड़ों तक समान रूप से पहुंचे.

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mritunjay baghel

मीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ें

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