लखीमपुर का अनोखा मंदिर,जहां समाधि पर चढ़ाई जाती है मदिरा, पूरी होती मनोकामनाएं

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लखीमपुर का अनोखा मंदिर,जहां समाधि पर चढ़ाई जाती है मदिरा, पूरी होती मनोकामनाएं


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लखीमपुर मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर अहमदनगर में स्थित प्राचीन मंदिर क्लेश हरण मंदिर स्थापित है. यहां लाखों की संख्या में शिव भक्त आते हैं. भगवान का जलाभिषेक करते हैं. मंदिर के समीप बनी बाबा दलेल गिरि की जी…और पढ़ें

उत्तर-प्रदेश के लखीमपुर जिले में एक अनोखा ऐसा मंदिर है. मंदिर की समीप बनी समाधि पर मदिरा चढ़ाई जाती है बिगड़े हुए सारे काम बन जाते हैं लोग अपनी मनोकामना मांगते हैं. जब मनोकामना पूर्ण हो जाती है उसके बाद लोग समाधि पर पहुंचकर पूजा अर्चना करने के बाद मदिरा चढ़ाते हैं. अपने शिव भक्तों को शराब पीते तो सुना होगा. किंतु देव भी शराब का सेवन करते हैं.

लखीमपुर मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर अहमदनगर में स्थित प्राचीन मंदिर क्लेश हरण मंदिर स्थापित है. यहां लाखों की संख्या में शिव भक्त आते हैं. भगवान का जलाभिषेक करते हैं. मंदिर के समीप बनी बाबा दलेल गिरि की जीवंत समाधि है. बिगड़े हुए सारे काम बन जाते हैं. समाधि पर गंगाजल ही बल्कि मदिरा चढ़ाई जाती है. जो सच्चे मन से मनोकामना मांगता है. वह मनोकामना पूर्ण हो जाती है. इसलिए लोग आते हैं. मदिरा समाधि पर चढ़ते हैं .

प्रसाद में पीते हैं मदिरा
महंत विष्णु गिरी ने भी जानकारी देते हुए बताया कि बाबा दलेल गिरी की जीवित समाधि काफी प्राचीन है. मदिरा किसने चढ़ाना शुरू किया था. किंतु जो शिव भक्त बाबा क्लेश हरण की पूजा करने आता है. इन समाज पर भी पूजा करना नहीं भूलता है लोग अपनी मनोकामना मांगते हैं. पूर्ण होने के बाद मदिरा चढ़ाई जाती है. उसके बाद प्रसाद के रूप में मंदिरा पीकर पुनः जीवन में न पीने का भी संकल्प लेते हैं. यहां काफी दूर से लोग आते हैं. उसके बाद एक बड़ा गड्ढा खोदा गया. उसमें बाबा दलेल गिरि ने समाधि लेगी. इसीलिए आज भी लोग समाधि पर पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं. अपनी मनोकामना मांगते हैं.

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