फतेहपुर के विवादित मकबरे पर सपा-बीजेपी में रार… सांसद रामजी लाल का आरोप- भाजपा के नेतृत्व में हुआ पूरा खेल

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फतेहपुर के विवादित मकबरे पर सपा-बीजेपी में रार… सांसद रामजी लाल का आरोप- भाजपा के नेतृत्व में हुआ पूरा खेल


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Abdul Samad’s Tomb Controversy : फतेहपुर के विवादित अब्दुल समद मकबरे को लेकर यूपी में सपा-बीजेपी के बीच सियासत और तेज हो गई है.जहां बीजेपी की तरफ से पूर्व विधायक विक्रम सिंह ने मोर्चा खोला है वहीं सपा ने राणा स…और पढ़ें

फतेहपुर के विवादित मकबरे पर सपा-बीजेपी में रार! सांसद रामजी लाल का आरोप...फतेहपुर का विवादित मकबरा
लखनऊ : फतेहपुर के विवादित मकबरे को लेकर यूपी में सपा-बीजेपी के बीच सियासत और तेज हो गई है. बीजेपी के सदर सीट से पूर्व विधायक विक्रम सिंह ने दावा किया कि यह स्थल असल में एक मंदिर है, जिस पर मुस्लिम पक्ष ने अवैध कब्जा कर मज़ार बना दी. उनका आरोप है कि सपा शासनकाल में इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर स्थानीय लोगों को पूजा-आरती से वंचित कर दिया गया. विक्रम सिंह के मुताबिक, घटना से पहले उन्होंने अधिकारियों को राजस्व अभिलेख देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने लापरवाही बरती, जिससे विवाद भड़क गया. विक्रम सिंह ने आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष ने घटना से ठीक पहले कुछ पुलिसकर्मियों से मिलकर नई चादर चढ़ाई, जिससे माहौल बिगड़ गया. वहीं, तोड़फोड़ के बाद अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं और सियासी बयानबाज़ी ने जिले का माहौल और गर्मा दिया है.

वहीं इस विवाद में अब राणा सांगा विवाद से सुर्खियों में आए सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि 7 अगस्त को भाजपा जिलाध्यक्ष और अन्य संगठनों ने डीएम से मजार पर धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी. इसके बावजूद भाजपा नेताओं और संगठनों ने अनुष्ठान के नाम पर उपद्रव किया.

भाजपा नेतृत्व में हुआ पूरा खेल
सुमन के मुताबिक, घटना के बाद भी मुकदमे में भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल का नाम नहीं लिखा गया, जबकि उन्होंने खुद इस कार्यक्रम का ऐलान किया था. सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस मूक दर्शक बनी रही और पूरा खेल भाजपा नेतृत्व में हुआ. उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा मुसलमानों को शक की नजर से देखती है, जबकि बंटवारे के वक्त भारत में रहने वाले मुसलमानों ने देश को चुना. सुमन ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व करने वाली सोफिया कुरेशी ने साबित कर दिया कि मुसलमानों के दिल में भारत बसता है. उन्होंने मांग की कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो, वरना आगरा से आंदोलन और प्रदर्शन शुरू किया जाएगा

क्या है हिंदू पक्ष का आरोप?
फतेहपुर के विवादित मकबरे पर तोड़फोड़ मामले में अब नया मोड़ आ गया है. NEWS18 से बातचीत में नामजद आरोपियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि पत्थरबाजी मुस्लिम पक्ष ने की थी और तलवार-असलहे दिखाकर लोगों को दौड़ाया गया. आरोपियों के मुताबिक, इसी आक्रोश में लोग पूजा-पाठ करने विवादित स्थल पर पहुंचे, लेकिन भीड़ में कुछ अराजक तत्व घुस गए और तोड़फोड़ कर दी. उन्होंने फतेहपुर एसपी पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाया और कहा कि पत्थरबाजी का वीडियो मौजूद होने के बावजूद मुस्लिम पक्ष पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई. मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे मकबरा विवाद का तापमान और बढ़ गया है.

क्या है विवादित स्थल का सच?
फतेहपुर के अब्दुल समद में मकबरे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है हिंदू संगठन इसे प्राचीन मंदिर बताते हुए पूजा की मांग कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे सदियों पुराना मकबरा मानता है. हिंदू संगठनों का दावा है कि यहां पहले भगवान शिव और ठाकुर जी का मंदिर था, जिसे तोड़कर मकबरे में बदल दिया गया, और आज भी परिसर में शिवलिंग, नंदी की मूर्ति, त्रिशूल, फूल जैसे धार्मिक चिन्ह मौजूद हैं. दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह अबू मोहम्मद और अबू समद की मजार है, जिसका निर्माण लगभग 10 साल में हुआ था. सरकारी रिकॉर्ड में खसरा नंबर 753 पर यह स्थल ‘मकबरा मांगी’ के नाम से दर्ज है और राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में संरक्षित है. इस मामले पर मेरठ के मौलानाओं के साथ हुई चौपाल में शहर काजी ने कहा कि घटना को अंजाम देने वालों पर रासुका के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं, नायब शहर काजी का मानना है कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और किसी अन्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए करवाई गई है

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