ये हैं 5 हरी मिर्च की सुपर किस्में, जिनकी रोपाई से किसानों को होगा बंपर मुनाफा
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साल के बारिश वाले मौसम में हरी मिर्च की खेती करना किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित होता है. सितंबर से अक्टूबर के बीच की जाने वाली ये खेती कम समय में अच्छी पैदावार देती है और आर्थिक लाभ भी बढ़ाती है. इस दौरान 5 ऐसी उन्नत मिर्च की किस्में हैं, जो कम लागत में भी किसानों को शानदार मुनाफा दिला सकती हैं. आइए जानते है इसके बारे में…
सितंबर का महीना हरी मिर्च की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस माह में किसान उन्नत प्रजाति पूसा ज्वाला की बुवाई करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. यह प्रजाति कीट और रोग प्रतिरोधक होती है. इसके पौधे बौने और झाड़ी के रूप के होते हैं, जबकि मिर्च का रंग हल्का हरा रहता है. पूसा ज्वाला मिर्च लगभग 130-150 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और इसकी पैदावार प्रति एकड़ 32-34 क्विंटल होती है.

हरी मिर्च की उन्नत प्रजातियों में जवाहर-148 भी शामिल है, जो कम समय में तैयार हो जाती है. यह प्रजाति प्रति हेक्टेयर 90-100 क्विंटल तक उत्पादन देती है, जबकि सूखने के बाद इसका वजन लगभग 18-20 क्विंटल रहता है.

हरी मिर्च की उन्नत प्रजातियों में तेजस्विनी भी शामिल है, जो उच्च पैदावार देती है. इसकी लंबाई लगभग 9-10 सेंटीमीटर होती है और बुवाई के लगभग 75 दिनों के बाद उत्पादन देना शुरू करती है. यह प्रजाति प्रति हेक्टेयर 200-250 क्विंटल तक हरी मिर्च का उत्पादन देती है.

हरी मिर्च की एक खास प्रजाति काशी अर्ली भी है, जिससे किसान अच्छी आय कमा सकते हैं. इसके पौधे की लंबाई 70–75 सेमी होती है और यह प्रति हेक्टेयर 300–350 क्विंटल तक उत्पादन देती है. बुवाई के लगभग 45 दिनों के अंतराल पर यह मिर्च उत्पादन देना शुरू कर देती है.

हरी मिर्च की उन्नतशील प्रजातियों में पंजाब लाल किस्म भी शामिल है, जो अच्छी पैदावार देने वाली प्रजाति मानी जाती है. इसके पौधे बौने, पत्तियां गहरे हरे रंग की और फल मध्यम आकार के होते हैं. यह प्रति हेक्टेयर 100–120 क्विंटल पैदावार देती है और मिर्च का रंग अपने नाम के अनुरूप लाल होता है.

हरिता प्रजाति की हरी मिर्च किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित होती है. इसकी उन्नत पैदावार के कारण किसान इस खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं और आर्थिक रूप से फायदा उठा सकते हैं.