इस तेल को बनाने में लगते हैं कई दिन, जोड़ों में रामबाण, बीजेपी का ये दिग्गज भी फैन, गाजीपुर का ब्रह्मास्त्र

0
इस तेल को बनाने में लगते हैं कई दिन, जोड़ों में रामबाण, बीजेपी का ये दिग्गज भी फैन, गाजीपुर का ब्रह्मास्त्र


गाजीपुर: क्या आपने कभी सुना है कि एक बूंद तेल दिमाग की थकान उतार दे और रोजाना 10 ग्राम पीने से याददाश्त तेज हो जाए? नहीं ना… लेकिन, गाजीपुर के स्टीमर घाट पर स्थित एक 189 साल पुरानी दुकान ऐसा ही दावा करती है. साल 1836 में बबुआ राम केसरी द्वारा स्थापित यह इत्र की दुकान अब केवल गुलाबजल और अत्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि यहां अब आयुर्वेदिक औषधीय तेल भी तैयार होते हैं. इनमें सबसे लोकप्रिय है ‘मीठा वच’ का तेल.

मीठा वच तेल की दिलचस्प कहानी
दुकान के मौजूदा संचालक श्याम केसरी बताते हैं कि मीठा वच, हल्दी जैसी एक जड़ी है. इसे घिसकर भी लिया जा सकता है. लेकिन जिनके पास समय नहीं होता, उनके लिए हम इसका अर्क निकालकर तेल बनाते हैं. यह प्रक्रिया आसान नहीं होती- पहले खल में पीसना, कूटना, फिर पानी में भिगोना… जब हल्की-सी गंध आने लगती है, तब उससे तेल तैयार होता है. यह तेल कम से कम 10 दिनों की प्रक्रिया के बाद बनता है और केवल ऑर्डर पर तैयार किया जाता है.

सुब्रमण्यम स्वामी भी थे नियमित ग्राहक
श्याम केसरी हंसते हुए बताते हैं कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी पहले रोज लगभग 10 ग्राम मीठा वच का तेल पीते थे. उनका कहना था कि यह तेल उनकी याददाश्त तेज रखने में मदद करता है, खासकर जब लिखने-पढ़ने और बोलने का दबाव होता था.

सिर्फ याददाश्त नहीं, शरीर के कई रोगों में फायदेमंद
मीठा वच का तेल सिर्फ दिमाग के लिए ही नहीं, बल्कि यह गठिया, जोड़ों के दर्द, सूजन, अनिद्रा और मानसिक तनाव में भी कारगर माना जाता है. इसे मालिश के लिए लगाया जा सकता है और विशेषज्ञ की सलाह पर सीमित मात्रा में पिया भी जा सकता है.

सिर्फ वच नहीं और भी हैं औषधीय खजाने
दुकान में और भी कई विशेष तेल उपलब्ध हैं जैसे:-
– कोयना का तेल
– पोस्ता का तेल (अफीम के बीज से)
– गुलकंद का तेल
– आंवले का तेल
– कद्दू का तेल
– मोरिंगा (सहजन) का तेल

हर तेल की अपनी खासियत है कोई हड्डियों के दर्द में राहत देता है, तो कोई पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है.

आठवीं पीढ़ी तक महकती विरासत
आज यह दुकान आदित्य केसरी और श्याम केसरी चला रहे हैं. यहां इत्र और गुलाबजल की भीनी-भीनी खुशबू के साथ जब ग्राहक औषधीय तेलों की माँग करते हैं, तो केसरी परिवार पीढ़ियों से चले आ रहे दादी-नानी के नुस्खों और आयुर्वेदिक ज्ञान के आधार पर तेल तैयार करता है. गाजीपुर का यह कोना सिर्फ महक नहीं, बल्कि एक जीवित परंपरा और स्वास्थ्य का खजाना बन चुका है, जो आज भी लोगों की यादों और सेहत दोनों को महका रहा है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *