Azamgarh News: नवाब का दिया वो तोहफा…जो बना आजमगढ़ की शान! आज भी इस अकादमी में है सुरक्षित
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Azamgarh Latest News: आजमगढ़ की शिब्ली अकादमी सिर्फ किताबों का खजाना नहीं बल्कि इतिहास का जीवंत आईना है. यहां मौजूद अकबरनामा की मूल प्रति आज भी सुरक्षित है, जिसे अकबर ने खुद लिखवाया था. इस किताब को लिखने और सजाने में 7 साल लगे थे.
अकबर के शासनकाल का आधिकारिक दस्तावेज
अकबरनामा को अकबर की किताब भी कहा जाता है. इसकी अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह अकबर के शासनकाल का आधिकारिक वृतांत है. इसमें शासन व्यवस्था, सामाजिक जीवन और अकबर के शाही दरबार का विस्तृत विवरण दर्ज है. इस पांडुलिपि को जिस कागज पर लिखा गया, वह भी आज तक सुरक्षित है. शिब्ली अकादमी के स्कॉलर उमर सिद्दीक बताते हैं कि यह अकबरनामा की मूल प्रति है जिस पर मुगलकालीन लिखावट, हस्तकला और दरबार के चित्र मौजूद हैं.
उमर सिद्दीक बताते हैं कि 1914 में जब अल्लामा शिब्ली नोमानी ने शिब्ली अकादमी की लाइब्रेरी की शुरुआत की थी, उस वक्त बड़े-बड़े लोग डोनेशन में किताबें देते थे. उसी समय एक नवाब ने तोहफे के तौर पर इस किताब को अकादमी को भेंट किया था. तब से यह ऐतिहासिक किताब यहां धरोहर के रूप में मौजूद है.
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लिखने और सजाने में लगे 7 साल
अकबरनामा को अकबर ने खुद लिखवाया गया था. जिसे उनके दरबारी इतिहासकार अबुल-फ़ज़ल इब्न मुबारक ने लिखा था. यह किताब फारसी भाषा में तैयार की गई थी जिसमें अकबर के जीवन और शासनकाल का विस्तार से वर्णन है. माना जाता है कि इस किताब को लिखने और सजाने में लगभग सात 7 का समय लगा था. इसे अकबर के शाही दरबार के 49 कलाकारों ने चित्रित किया था जो मुगल चित्रकला शैली के श्रेष्ठ उस्ताद माने जाते थे.

पिछले 5 साल से मीडिया में सक्रिय, वर्तमान में News18 हिंदी में कार्यरत. डिजिटल और प्रिंट मीडिया दोनों का अनुभव है. मुझे लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें लिखना और पढ़ना पसंद है.
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