माघ मेला में आस्था की डुबकी, चमड़ा उद्योग पर पड़ेगा बंदी का असर, टेनरियां रहेंगी पूरी तरह बंद, जानें हकीकत

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माघ मेला में आस्था की डुबकी, चमड़ा उद्योग पर पड़ेगा बंदी का असर, टेनरियां रहेंगी पूरी तरह बंद, जानें हकीकत


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Kanpur Latest News : माघ मेला के दौरान गंगा की अविरलता और निर्मलता बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने कड़े कदम उठाए हैं. शासन के निर्देश पर कानपुर की सभी टेनरियों को प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान पूरी तरह बंद रखा जाएगा. इसके लिए टेनरी संचालकों का रोस्टर भी जारी कर दिया गया है. निर्णय का उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्वच्छ गंगा जल उपलब्ध कराना और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण करना है.

कानपुर: शासन के आदेश के अनुसार माघ मेला के सभी प्रमुख स्नान पर्वों की तिथि से तीन दिन पहले और स्नान पर्व के अगले दिन तक कानपुर की टेनरियों में किसी भी तरह का उत्पादन कार्य नहीं होगा. इस दौरान चमड़ा प्रसंस्करण से जुड़ी सभी गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी. प्रशासन का मानना है कि इससे टेनरियों से निकलने वाला दूषित पानी गंगा में जाने से रोका जा सकेगा. माघ मेला के दौरान देश भर से लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचते हैं. ऐसे में शासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता. प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आस्था के पर्वों पर गंगा जल की शुद्धता सर्वोपरि है और इसके लिए अस्थायी तौर पर कठोर निर्णय लेना जरूरी है.

गंगा प्रदूषण को लेकर पहले से उठते रहे हैं सवाल
शासन का मानना है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट गंगा प्रदूषण का बड़ा कारण है. खासकर टेनरियों से निकलने वाले रसायन युक्त पानी को लेकर समय समय पर सवाल उठते रहे हैं. इसी वजह से माघ मेला के दौरान टेनरियों को पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक यह व्यवस्था अस्थायी है, लेकिन बेहद जरूरी है.

चमड़ा उद्योग पर मंडराने लगा संकट
दूसरी ओर इस फैसले से कानपुर का चमड़ा उद्योग गंभीर संकट में नजर आ रहा है. कानपुर का लेदर उद्योग देश और विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है. हजारों श्रमिकों और कर्मचारियों की रोजी रोटी इसी उद्योग पर निर्भर है. टेनरी संचालकों का कहना है कि पहले से ही बाजार में मंदी चल रही है और ऐसे में बार बार उत्पादन बंद होने से नुकसान बढ़ रहा है. काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने कहा कि गंगा की सफाई और संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है. टेनरी संचालक शासन के फैसले का सम्मान करते हैं और रोस्टर के अनुसार उत्पादन बंद रखेंगे. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इससे कारोबार पर सीधा असर पड़ता है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

विदेशी ऑर्डर और रोजगार पर पड़ रहा असर
असद इराकी ने बताया कि उत्पादन रुकने से विदेशी ग्राहक असमंजस में पड़ जाते हैं. कई बार तय समय पर ऑर्डर पूरे नहीं हो पाते, जिससे ग्राहक दूसरे देशों का रुख कर लेते हैं. इसका सीधा असर निर्यात, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. टेनरी संचालकों ने यह सवाल भी उठाया कि गंगा प्रदूषण के लिए हर बार सिर्फ टेनरियों को ही जिम्मेदार ठहराना कितना उचित है. उनका कहना है कि गंगा में गिरने वाले नाले, घरेलू सीवर और अन्य औद्योगिक इकाइयों पर भी उतनी ही सख्ती होनी चाहिए. उन्होंने गंगा की स्वच्छता के लिए स्थायी और ठोस नीति बनाने की मांग की है.

माघ मेला के प्रमुख स्नान पर्व
माघ मेला के दौरान पौष पूर्णिमा स्नान 3 जनवरी, मकर संक्रांति स्नान 15 जनवरी, मौनी अमावस्या स्नान 18 जनवरी, बसंत पंचमी स्नान 23 जनवरी, माघी पूर्णिमा स्नान 1 फरवरी और महाशिवरात्रि स्नान 15 फरवरी को होगा. इन सभी पर्वों से तीन दिन पहले और अगले दिन तक कानपुर की टेनरियों में ताला लटका रहेगा. माघ मेला में एक ओर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे, वहीं दूसरी ओर चमड़ा उद्योग को इस बंदी की कीमत चुकानी पड़ेगी. अब यह देखना अहम होगा कि शासन गंगा की निर्मलता और उद्योगों के हितों के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करता है.

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माघ मेला में आस्था की डुबकी, चमड़ा उद्योग पर पड़ेगा बंदी का असर, टेनरियां रहें



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