राधा रानी ने भगवान कृष्ण से किया था छल, बन गई थीं उनकी बड़ी भैया, जानें आखिर क्यों किया ऐसा

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राधा रानी ने भगवान कृष्ण से किया था छल, बन गई थीं उनकी बड़ी भैया, जानें आखिर क्यों किया ऐसा


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Interesting Story of Lord Krishna: भगवान कृष्ण बड़े नटखट थे. वह अपनी लीलाओं से लोगों को हमेशा ही चौंका देते थे. मगर, उन्हें नहीं पता था कि उनकी प्रिय सखी राधा रानी उनके साथ एक छल कर देंगी.जब कान्हा को पता चला तो वो भी समझ नहीं पाए कि उनकी प्रिय ने ऐसा क्यों किया. वृंदावन में द्वापर काल की इस लीला का दर्शन आपको देखने और सुनने को आज भी मिल जाएगा.

मथुरा: द्वापर युग भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से ओतप्रोत है. कान्हा और बलराम जी द्वापर में लीलाएं किया करते थे. उन्होंने कई ऐसी लीला की हैं, जिन्हें आज भी कलयुग के दौर में देखा जा सकता है. कान्हा जी बचपन से ही बड़े शरारती थे. वह अक्सर लोगों को अपनी शरारतों से तंग करते रहते थे. मगर उन्हें नहीं पता था कि उनकी प्रिय सखी राधा रानी भी कुछ ऐसा कर देंगी. दरअसल, एक लीला ऐसी थी, जो राधा रानी ने की है. आज भी वृंदावन में द्वापर काल की इस लीला का दर्शन आपको देखने और सुनने को मिल जाएगा.

वृंदावन में अटल वन के नाम से विख्यात इस वन को भगवान कृष्ण की लीला स्थल माना गया है. कृष्ण भले ही योगीराज थे और छलिया थे. मगर, कृष्ण की प्राण प्यारी राधा रानी ने भी उनसे एक बार छल किया था. लाडली ने भगवान के बड़े भाई दाऊ जी का रूप रख कर कान्हा से हंसी ठिठौली की थी. गोरे दाऊजी मंदिर वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर बना है. यहां पर भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई विराजमान हैं. कहा जाता है कि यहां पर राधा रानी की एक लीला आपको देखने को मिलती है.

गोरे दाऊजी मंदिर के पुजारी दास अजयराम दास महाराज ने लोकल 18 को मंदिर की मान्यता के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि द्वापर युग की बात है. भगवान श्री कृष्ण गायों को लेकर वृंदावन में गौचारण के लिए जाते थे. एक बार कृष्ण के बड़े भाई दाऊजी किन्ही कारणों से गौचारण के लिए नहीं गए. उन्होंने कृष्ण से मना कर दिया. तब कान्हा गायों को लेकर अकेले ही चल पड़े. यमुना के किनारे गायों को ले जाकर गौचारण के लिए बैठ गए.

राधा रानी की सखियों को जब यह पता चला कि दाऊजी कृष्ण के साथ नहीं गए हैं, तो उनकी अष्ट सखियों ने यह बात उन्हें बताई. राधा रानी ने जब यह सुना तो उनके मन में आया कि क्यों ना कृष्ण को आज परेशान किया जाए. राधा रानी कान्हा के बड़े भाई दाऊजी का रूप लेकर यमुना के किनारे पहुंच गईं. कृष्ण ने जब देखा कि दाऊजी पीछे से आ गए हैं, तो उन्होंने पूछा कि दादा आपने तो मना किया था कि आप नहीं आएंगे, तो फिर क्यों आ गए.

राधा रानी दाऊजी के रूप में उनके पास आकर खड़ी हो गईं. कृष्ण को यह पता नहीं लग पाया कि यह दाऊजी है या राधा रानी. यमुना के किनारे गौचारण करते वक्त कृष्ण और दाऊजी खेला करते थे. कृष्ण ने कहा कि दादा चलो खेलते हैं. उनके कंधे पर हाथ रखने को जैसे ही कृष्णा हुआ करते थे, तो राधा रानी उन्हें इग्नोर करने लगीं. लाडली जूं अपने आप को नहीं छूने दे रही थीं.

कृष्ण ने सोचा कि दादा को आज हुआ क्या है. पहले तो दादा ऐसा नहीं करते थे. लेकिन उन्होंने जब राधा रानी को छुआ तो पता चल गया कि दादा के रूप में तो लाडली सरकार आई हुई हैं. तब से लेकर आज तक यह लीला गोरे दाऊजी मंदिर में चली आ रही है. गोरे दाऊ जी मंदिर में राधा रानी विराजमान हैं.

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