आप भी कमाना चाहते हैं अधिक मुनाफा तो पारंपरिक छोड़ ऑर्गेनिक खेती अपनाएं, घर बैठे कमाए लाखों रुपए, जानें तरीका

0
आप भी कमाना चाहते हैं अधिक मुनाफा तो पारंपरिक छोड़ ऑर्गेनिक खेती अपनाएं, घर बैठे कमाए लाखों रुपए, जानें तरीका


Last Updated:

Shifting towards medicinal crops : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. यहां के किसान अब परंपरागत फसलों से आगे बढ़कर मसाले और औषधीय फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. खासतौर पर ऑर्गेनिक तरीके से की जा रही काली हल्दी की खेती किसानों के लिए आय का नया और लाभकारी स्रोत बनकर उभर रही है.

लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब केवल गेहूं, धान और गन्ने जैसी परंपरागत फसलों पर निर्भर नहीं हैं. जिले में मसाले की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कम लागत और अधिक मुनाफे की वजह से मसाले की फसलें किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. हल्दी भारतीय रसोई के साथ-साथ औषधीय उपयोगों में भी अहम स्थान रखती है. बाजार में हल्दी की लगातार बनी रहने वाली मांग किसानों को इसकी खेती के लिए प्रेरित कर रही है. बेहतर दाम और स्थिर बाजार के कारण किसान इसे सुरक्षित और लाभकारी विकल्प मान रहे हैं.

निघासन क्षेत्र के किसान मनोज पांडे की पहल
निघासन तहसील क्षेत्र के प्रगतिशील किसान मनोज कुमार पांडे ने खेती में नया प्रयोग करते हुए काली हल्दी की ऑर्गेनिक खेती शुरू की है. उन्होंने ट्रायल के तौर पर दो बीघा जमीन में काली हल्दी उगाई है. उनके अनुसार, पारंपरिक फसलों के साथ इस तरह की खेती जोखिम को कम करती है और आय के नए रास्ते खोलती है.

काली हल्दी एक बहुमूल्य औषधीय जड़ी बूटी
किसान मनोज पांडे बताते हैं कि काली हल्दी एक महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी बूटी है. इसका उपयोग मुख्य रूप से आयुर्वेदिक और अन्य चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता है. काली हल्दी का उपयोग भोजन के रूप में नहीं होता, बल्कि यह दवाइयों और औषधीय उत्पादों में इस्तेमाल की जाती है, जिससे इसकी बाजार में विशेष मांग बनी रहती है.

सुगंधा वैरायटी बनी किसानों की पसंद
मनोज पांडे के अनुसार, सुगंधा वैरायटी की देसी काली हल्दी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसकी खास खुशबू और बेहतरीन औषधीय गुण इसे अन्य किस्मों से अलग बनाते हैं. यही वजह है कि व्यापारी और औषधि निर्माता इसे अच्छे दामों पर खरीदने को तैयार रहते हैं.

पूरी तरह जैविक तरीके से हो रही खेती
काली हल्दी की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है. इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता. वर्मी कंपोस्ट और जीवामृत का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है. इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता.

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनती काली हल्दी
लखीमपुर खीरी में काली हल्दी की सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक और जैविक तरीके अपनाएं, तो मसाले और औषधीय फसलों की खेती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है.

homeuttar-pradesh

आप भी कमाना चाहते हैं अधिक मुनाफा तो पारंपरिक छोड़ ऑर्गेनिक खेती अपनाएं



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *