सालों पहले जब डिटर्जेंट नहीं था, तो कैसे चमकते थे बर्तन? जानिए गांव का जीरो खर्च 100% वर्क वाला ये तरीका

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सालों पहले जब डिटर्जेंट नहीं था, तो कैसे चमकते थे बर्तन? जानिए गांव का जीरो खर्च 100% वर्क वाला ये तरीका


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Natural Utensils Cleaning: गांव की महिलाएं बर्तन साफ करने के लिए आज भी पुराने देसी नुस्खे का इस्तेमाल करती हैं. धान की भूसी, धान की पराली और राख से बर्तन इतनी आसानी से साफ हो जाते हैं कि डिटर्जेंट और साबुन की जरूरत ही नहीं पड़ती. मिट्टी के चूल्हे पर पके बर्तन भी कुछ ही देर में चमकने लगते हैं और यह तरीका न केवल प्रभावी बल्कि इको फ्रेंडली भी है.

सुल्तानपुर: आज के समय में बाजार में डिटर्जेंट और साबुन आसानी से उपलब्ध हैं. लेकिन लगभग 30 साल पहले ग्रामीण क्षेत्रों में यह चीजें आम लोगों के पास नहीं हुआ करती थीं. उस समय बर्तन मांजने का एक पारंपरिक और प्राकृतिक तरीका गांव की महिलाओं द्वारा अपनाया जाता था, जो आज भी कई घरों में इस्तेमाल किया जाता है. इस पारंपरिक तरीके में धान की भूसी, राख और धान की पराली का उपयोग किया जाता था. इस विधि से बर्तन चाहे कितना भी काला हो, आसानी से साफ हो जाते थे.

पुराने समय में बर्तन साफ करने की चुनौती
ग्रामीण निर्मला देवी लोकल 18 बताती हैं कि पुराने समय में निरमा और डिटर्जेंट का जुगाड़ आम लोगों के पास नहीं होता था. सिलेंडर चूल्हे की सुविधा भी नहीं थी. लोग मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाते थे, जिससे बर्तन बहुत काले हो जाते थे. ऐसे में महिलाएं देसी उपाय अपनाती थीं और प्राकृतिक सामग्री से बर्तन साफ करती थीं.

धान की भूसी, पराली और राख से बर्तन साफ
निर्मला देवी आगे बताती हैं कि धान की भूसी, धान की पराली और राख का मिश्रण बर्तन साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. धान की पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर तैयार किया जाता था. इसके बाद बर्तन को इस मिश्रण से रगड़ कर मांजा जाता था. इसमें थोड़ी मेहनत जरूर लगती थी, लेकिन परिणाम शानदार होते थे. बर्तन जल्दी और पूरी तरह से साफ हो जाते थे.

उस समय मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाना आम था, जिससे बर्तन ज्यादा काले हो जाते थे. लेकिन इस पारंपरिक विधि से केवल कुछ ही देर में बर्तन पूरी तरह साफ हो जाते थे. यह तरीका न केवल प्रभावी था, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक और रसायन-मुक्त था. इसे अपनाने से पानी और घरेलू संसाधनों की भी बचत होती थी.

आधुनिक समय में पारंपरिक विधि का महत्व
आज जबकि डिटर्जेंट और साबुन आसानी से उपलब्ध हैं, फिर भी यह पारंपरिक तरीका हमें याद दिलाता है कि प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करके भी घर के काम को आसानी से किया जा सकता है. यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि स्वास्थ्य और घरेलू संसाधनों की बचत के लिए भी लाभकारी है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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