Kaddu Farming : कद्दू की ये टॉप वैरायटी, सर्दियों में बदल रही किसानों की किस्मत, 7 हजार लगात, कमाई 70 हजार
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Pumpkin Farming : कद्दू की इस वैरायटी को खासतौर पर ठंड के दिनों में उगाया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. 56 कद्दू उगाने के लिए रेतीली और दोमट मिट्टी सबसे सही है. इसकी अच्छी पैदावार लेने के लिए अच्छी जल निकास वाली भूमि होनी चाहिए. इस कद्दू की डिमांड होटल, रेस्टोरेंट और मंडियों में ज्यादा रहती है. बुवाई के 40 से 50 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है. 56 कद्दू दो किस्मों का है. एक गोल वाला, दूसरा लंबा. लागत एक बीघे में 7 से 8 हजार रुपए आती है. मुनाफा 60 से 70 हजार रुपए तक आराम से हो जाता है.
बाराबंकी. कद्दू की सब्जी किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है. इसकी 56 कद्दू वैरायटी खूब डिमांड में रहती है. 56 कद्दू खासतौर पर ठंड के दिनों में उगाया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. दूसरी सब्जियों की तुलना में इसकी पैदावार अधिक होती है और लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है, जिससे किसानों को जबरदस्त मुनाफा होता है. किसान अगर सही समय पर इसकी बुवाई करें और उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करें, तो एक बीघा या एक एकड़ में इसकी खेती से अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं. 56 कद्दू उगाने के लिए रेतीली और दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसकी अच्छी पैदावार लेने के लिए अच्छी जल निकास वाली भूमि होनी चाहिए.
कहां-कहां डिमांड
बाराबंकी जिले के बडेल गांव के रहने वाले किसान मोनू यादव करीब दो बीघे में 56 कद्दू की खेती कर एक फसल पर 60 से 70 हजार रुपये मुनाफा कमा रहे हैं. किसान मोनू यादव लोकल 18 से बताते हैं कि हम ज्यादातर सब्जियों की खेती करते हैं, जिसमें मटर, शिमला मिर्च, टमाटर और फूलगोभी शामिल हैं. इस समय हमारे पास करीब दो बीघे में 56 कद्दू लगा रखा है. ये दो किस्म का है. एक गोल वाला, दूसरा लंबा. लागत एक बीघे में 7 से 8 हजार रुपए आती है. मुनाफा 60 से 70 हजार रुपए तक हो जाता है. 56 कददू की डिमांड होटल, रेस्टोरेंट और मंडियों में ज्यादा रहती है. इसका इस्तेमाल सब्जियों के अलावा और भी कई चीजों में होता है.
खेती का तरीका
मोनू यादव के मुताबिक, कद्दू की खेती करना काफी आसान है. पहले हम खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करते हैं. फिर गोबर और अन्य खादों का छिड़काव कर खेत को समतल करते हैं. इसके बाद खेत में मेड़ बनाकर कद्दू के बीजों की लाइन टू लाइन बुवाई करते हैं. कुछ दिन बाद जब पौधा थोड़ा बड़ा हो जाता है तब इसकी सिंचाई करनी होती है. 40 से 50 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है. अब इसे बाजार में बेच सकते हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें