फौजी बनने का था सपना, नहीं हुआ पूरा तो खोली यह दुकान, बदल गई किस्मत! रोजाना हो रही बंपर कमाई

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फौजी बनने का था सपना, नहीं हुआ पूरा तो खोली यह दुकान, बदल गई किस्मत! रोजाना हो रही बंपर कमाई


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Success Story: सुल्तानपुर के दुर्गेश जायसवाल ने आर्मी में भर्ती न हो पाने के बाद हार नहीं मानी. उन्होंने समोसे की दुकान शुरू की और आज रोज़ 800 से ज्यादा समोसे बेचते हैं. इससे उन्हें प्रतिदिन 2 से 3 हजार रुपये की बचत हो रही है और वे अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं.

कभी-कभी हम लोग अपने देखे गए सपना के लिए काफी प्रयास करते हैं, लेकिन अथक प्रयास करने के बावजूद भी उसमें हम सफल नहीं हो पाते. उसके बाद काफी लोग निराश हो जाते हैं, हताश हो जाते हैं और हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाते हैं, लेकिन सुल्तानपुर के एक नौजवान दुर्गेश जायसवाल ने आर्मी का सपना देखा था, लेकिन जब वह आर्मी में भर्ती नहीं हो पाया तो उसने हार नहीं मानी और वह खुद का व्यापार करने लगा और उसने एक समोसे की दुकान खोली और आज वह प्रतिदिन 800 समोसा बेचकर अच्छी कमाई कर रहा है. उसका समोसा खाने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है. ऐसे में आइए जानते हैं क्या है इनकी सफलता की कहानी.

इस तरह से की शुरुआत 
सुल्तानपुर मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर लंभुआ विधानसभा के शाहगढ़ बाजार के रहने वाले दुर्गेश कुमार जायसवाल लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई के बाद कई सालों तक आर्मी में भर्ती होने का प्रयास किया. उनका यह सपना था कि वह आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा करें, लेकिन किसी  कारणवश वे भर्ती के दौरान बाहर हो गए और उनका आर्मी में भर्ती होने का सपना अधूरा ही रह गया. इसके बाद उन्होंने अपने पारिवारिक व्यवसाय समोसा की दुकान खोला और समोसा बेचकर वे अब अच्छी कमाई कर रहे हैं.

बेचते हैं इतना समोसा 
दुर्गेश जायसवाल का समोसा काफी प्रसिद्ध है. प्रतिदिन वे 800 समोसा से अधिक की बिक्री करते हैं. जिससे उनको प्रतिदिन दो से ₹3 हजार रुपए की बचत होती है. दुर्गेश कहते हैं कि वह आर्मी के अपने सपने को तो पूरा नहीं कर पाए, लेकिन अब समोसा बेचकर वे अच्छी कमाई कर रहे हैं, जिससे वह अपनी पढ़ाई को भी आगे जारी रखे हुए हैं.

यहां तक की है पढ़ाई 
दुर्गेश ने बताया कि वह ग्रेजुएशन में बैचलर ऑफ आर्ट की पढ़ाई किए हुए हैं. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने अपने भाई के साथ समोसे की दुकान खोली और अब वह इसी समोसे की दुकान से अच्छी कमाई कर रहे हैं.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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